डॉ ओशो शैलेन्द्र, ओशोधारा नानक धाम, मुरथल, सोनीपत, संपर्क : 09891532889 यह मुद्रा शंख मुद्रा का सरल रूप है. इस मुद्रा से बवासीर (piles) दूर होता है. जब गुदाद्वार के आसपास छाले उत्पन्न हों, तो उसे फिशर कहा जाता है. छाले उत्पन्न होने का मुख्य कारण है कब्ज. सहज शंख मुद्रा के प्रयोग से तुतलाना […]
यह मुद्रा शंख मुद्रा का सरल रूप है. इस मुद्रा से बवासीर (piles) दूर होता है. जब गुदाद्वार के आसपास छाले उत्पन्न हों, तो उसे फिशर कहा जाता है. छाले उत्पन्न होने का मुख्य कारण है कब्ज. सहज शंख मुद्रा के प्रयोग से तुतलाना बंद होता है. जो बच्चे तुतलाते हैं, उन्हें इस मुद्रा के अभ्यास से लाभ होता है. इस मद्रा से सभी स्वर दोष दूर होते हैं. इससे गले के रोग भी ठीक होते हैं तथा आवाज मधुर बनती है.
शब्द शक्ति और वाक शक्ति बढ़ाने के लिए सहज शंख मुद्रा अद्भुत क्षमता प्रदान करती है. यह वक्ताओं और शिक्षकों के लिए अत्यंत लाभकारी है. इस मुद्रा के प्रयोग से पाचन शक्ति बढ़ती है, गैस एवं आंतों के रोग दूर होते हैं. महिलाओं के मासिक धर्म की अनियमितता समाप्त होती है. इस मुद्रा में हथेलियों को परस्पर दबाने पर, हथेली में अंगूठे के नीचे वाले भाग में दबाव पड़ता है, जिसका मणिपुर चक्र पर विशेष प्रभाव पड़ता है. मणिपुर चक्र के साथ ही अनाहत चक्र (हृदय के पीछे) पर भी प्रभाव पड़ता है और रक्त संचार ठीक होता है. जब इस मुद्रा को मूलबंध लगाकर करते हैं, तो और भी अधिक लाभ होता है. मूलबंध के साथ करने से पुरुषों में सहवास की शक्ति बढ़ती है एवं स्नायु तंत्र मजबूत होता है.
कैसे करें : इस मुद्रा में दोनों उंगलियों को आपस में फंसा कर, हथेलियां दबाकर दोनों अंगूठे को मिलाकर तर्जनी उंगली को हलके से दबाएं.
कितनी देर : इस मुद्रा को दिन में दो-तीन बार 15-15 मिनट के लिए करें.