वैज्ञानिकों ने पाया है कि है कि बार-बार इस्तेमाल किये जानेवाले किचन स्पंज में बैक्टीरिया आपके मल से भी अधिक होते हैं. साबुन और पानी स्पंज में खास तरह के बैक्टीरिया की मौजूदगी को और सघन बनाते हैं.
साइंटिफिक रिपोर्ट्स में छपी जर्मन वैज्ञानिकों की शोध के अनुसार, जब शोधकर्ताओं ने स्पंज को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर देखा, तो पाया कि एक क्यूबिक सेंटीमीटर स्पंज में उतने बैक्टीरिया हो सकते हैं, जितने आपके मल में. लेकिन खतरनाक बात यह है कि स्पंज को उबालने या उन्हें माइक्रोवेव में रखने से भी ये बैक्टीरिया खत्म नहीं होते. बल्कि पानी, साबुन या डिटर्जेंट से लगातार धोये जानेवाले स्पंज में खतरनाक किस्म के बैक्टीरिया अपनी मौजूदगी और मजबूत कर लेते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार खतरनाक बैक्टीरिया काफी प्रतिरोधी भी होते हैं और डिटर्जेंट से साफ हो जानेवाले दूसरी तरह के बैक्टीरिया की छोड़ी हुई जगह लेकर तेजी से लेकर फैल जाते हैं.
कुछ जानकार स्पंज को ब्लीच सॉल्यूशन से धोने का सुझाव देते हैं. न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजी विभाग में प्रोफेसर फिलिप टिएर्नो कहते हैं कि अगर हम स्पंज को सही तरह से साफ नहीं करते, तो मतलब है कि हम बर्तनों को बैक्टीरिया की परतों से रगड़ रहे हैं.
नौ हिस्सा पानी और एक हिस्सा ब्लीच मिलाकर बनाये तरल से स्पंज को साफ करना बेहतर है. हमेशा दस्ताने पहनकर स्पंज पर वह तरल थोड़ा सा गिराएं और उसे 10 से 30 सेकेंड तक ऐसे ही छोड़ दें. इसके बाद स्पंज को निचोड़ें और सूखने के लिए रख दें. जब भी स्पंज बदबूदार होता हो उसे फौरन बदलें.
