बरसात के मौसम में बच्चों में कई समस्याएं देखी जाती हैं, जिनमें सर्दी-बुखार, नाक बहना, सांस लेने में तकलीफ, दस्त, हैजा और निमोनिया सबसे ज्यादा हैं.
बच्चों में दस्त का प्रमुख कारण जियार्डिया नामक प्रोटोजोआ है, जिसके कारण बच्चों में पतला दस्त होने लगता है और शरीर में पानी और खनिज की कमी होने लगती है. जिन जगहों पर साफ-सफाई का अभाव हो, वहां यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. इसका इन्फेक्शन मुंह के जरिये छोटी आंत तक फैलती है. यह आंत को डैमेज भी करता है, जिस कारण यह रोग लंबे समय तक बच्चे को परेशान कर सकता है.
लक्षण व होमियोपैथिक उपचार : अधिकतर बच्चों में इसके लक्षण बहुत ही सामान्य होते है इस कारण इस रोग का आसानी से पता नहीं चल पाता है.
कभी-कभी इसकी पुष्टि मल जांच के बाद ही हो पाती है. हालांकि, इसके लक्षण आवाज के साथ पतला दस्त, दस्त में तेज दुर्गंध होना, पेट दर्द, उल्टी आदि है. दस्त के साथ खून या म्यूकस नहीं आता है, कुछ बच्चे क्रॉनिक दस्त से ग्रसित हो जाते है, इससे उनके शारीरिक विकास में भी बाधा उत्पन्न होती है. कभी-कभी आंतों की इडोस्कोपी से भी यह रोग पकड़ में आता है. आंतों की बायोप्सी भी करनी पड़ सकती है.
बीमारी के एक बार कंफर्म करने के बाद इलाज करना आसान हो जाता है. होमियोपैथिक दवा PODOPNYLLUM, TEUERIUM आदि दवाइयां कुछ दिनों तक देने से रोग में लाभ होता है.सलाह है कि यह दवा चिकित्सक के सलाह से ही दें. बच्चों में ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करना चाहिए.
