जानिए कम आयवाले देशों में जनमे बच्चों का वेट क्‍यों होता है कम !

खराब सेहतवाली माओं के पैदा हो रहे कमजोर बच्चे शोध. कम आयवाले देशों में जनमे बच्चों का वेट कम शोधकर्ताओं का मानना है कि कम आयवाले देशों में जन्म लेनेवाले बच्चे सामान्य से कम वजन के होते हैं. इसकी वजह माताओं को सही स्वास्थ्य सुविधा का न मिलना है. कम आय वाले देशों में जन्मलेनेवाले […]

खराब सेहतवाली माओं के पैदा हो रहे कमजोर बच्चे
शोध. कम आयवाले देशों में जनमे बच्चों का वेट कम
शोधकर्ताओं का मानना है कि कम आयवाले देशों में जन्म लेनेवाले बच्चे सामान्य से कम वजन के होते हैं. इसकी वजह माताओं को सही स्वास्थ्य सुविधा का न मिलना है.
कम आय वाले देशों में जन्मलेनेवाले बच्चों का वेट कम होता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि इसकी वजह गर्भ में बच्चे का सही पोषण न होना व समय से पहले बच्चे की डिलिवरी होना है. इसके अन्य कारक भी है जैसे गर्भधारण के दौरान मां को इंफेक्शन होना, सही हेल्थ केयर न मिल पाना. असमय पैदा हुए बच्चे छोटे होते हैं और इनके मरने की संभावना ज्यादा होती हैं.
इस रिसर्च का परिणाम बीएमजेड पत्रिका में प्रकाशित किया गया. रिसर्च में 40 से अधिक जांचकर्ताओं ने वैश्विक रूप से सहयोग किया था. शोधकर्ताओ ने इंटनेशनल बर्थ वेट स्टैंडर्ड के अनुसार जन्म लेनेवाले बच्चों के भार का आकलन किया. शोधकर्ताओं ने पाया कि वैश्विक स्तर पर कम और सामान्य इनकम वाले देशों में वर्ष 2012 में 23.3 मिलियन बच्चों ने जन्म लिया, जिनमें लगभग 1.5 मिलियन बच्चों का जन्म समय से पहले हुआ और ये बच्चे औसत से छोटे थे. शोधकर्ताओं ने बताया कि इनमें से 6,06,500 बच्चों की बाद में विभिन्न कारणों से मौत हो गयी. सबसे खराब स्थिति साउथ एशिया में देखी गयी जहां तीन में एक बच्चे औसत से छोटे पैदा हुए.
नवंबर 2016 में, डब्लूएचओ ने मृत प्रसव और गर्भावस्था में जटिलताओं के जोखिम को कम करने के लिए प्रसव पूर्व देखभाल मॉडल जारी किया है. वर्ष 2015 में एक अनुमान के अनुसार, भारत में 3 लाख महिलाओं की मृत्यु गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं के कारणों से हुई है. जबकि 27 लाख बच्चों की मृत्यु जीवन के पहले 28 दिन के भीतर हुई है. विश्व स्तर पर देखें तो 26 लाख बच्चों का, जन्म के समय मृत्यु हुई है. यह जानकारी डब्लूएचओ के आंकड़ों में सामने आयी है. स्वास्थ्य को लेकर जारी आंकड़ो के अनुसार भारत में पांच साल से नीचे के 38.7 प्रतिशत बच्चों का कद उम्र के हिसाब से छोटा है.
19.8 प्रतिशत बच्चे कमजोर हैं और वहीं 42.4 प्रतिशत बच्चों का वजन सामान्य से भी कम है. अभी भी देश में पांच वर्ष से कम उम्र के 40 लाख बच्चे कुपोषित हैं.यह आंकड़े भारत पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन (पीएचएफआइ) के भारत में पोषण सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य रिपोर्ट 2015 पर आधारित है. पीएचएफआइ ने रैपिड सर्वे ऑन चिल्ड्रेन नामक शोध के जरिये कपोषित बच्चों के स्वास्थ्य पर होने वाले सार्वजनिक खर्चे के प्रभाव का अध्ययन किया. यह सब मां, नवजात शिशु और बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल में सुधार के लिए एक नये नेटवर्क का हिस्सा है. इस नेटवर्क में बांग्लादेश, कोटे डी आइवर, इथोपिया, घाना, मलावी, नाइजीरिया, तंजानिया और युगांडा शामिल है.
कम इनकमवाले देशों में बच्चों का जन्म 23.3 मिलियन
भारत में 40 लाख बच्चे अभी भी कुपोषित
भारत में 40 वर्षों से राष्ट्रीय शिशु स्वास्थ्य प्रोग्राम चल रहा है. यह दुनिया की बड़ी योजनाओं में शामिल है. पिछले एक दशक में इस योजना के खर्च में 200 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है. उसके बावजूद कुपोषित बच्चों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >