यूरिक एसिड का बढ़ना है खतरनाक

करीब 32 साल की एक महिला मेरे पास चक्कर आने की शिकायत लेकर आयी. शरीर में काफी दर्द भी था. मेरे इलाज से भी जब उन्हें फायदा नहीं हुआ, तो मैंने न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेने को कहा, पर 15 दिन बाद वे फिर से मेरे पास आयीं और मेरे क्लीनिक में ही चक्कर खाकर फर्श […]

करीब 32 साल की एक महिला मेरे पास चक्कर आने की शिकायत लेकर आयी. शरीर में काफी दर्द भी था. मेरे इलाज से भी जब उन्हें फायदा नहीं हुआ, तो मैंने न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेने को कहा, पर 15 दिन बाद वे फिर से मेरे पास आयीं और मेरे क्लीनिक में ही चक्कर खाकर फर्श पर गिर गयीं.

जब उनकी जांच की तो सीबीसी नॉर्मल था, पर यूरिक एसिड (7.5 mg/dL) काफी बढ़ा हुआ था. अत: उन्हें Febuxostat दवा दी गयी. करीब दो सप्ताह की खुराक के बाद उनका यूरिक एसिड का लेवल काफी कम (5.4 mg/dL) हो गया था.

चक्कर आने की समस्या भी अब ठीक हो चुकी थी. यूरिक एसिड अमूमन 7 mg/dL से ज्यादा हो, तो कई तरह की परेशानियां आती हैं, पर कुछ लोगों में यह 4mg/dL से अधिक होने पर भी परेशान करता है. यूरिक एसिड बनने के बाद हमारे रक्त में घुलकर किडनी से होते हुए यूरिन के जरिये बाहर निकल जाता है. यदि यह यूरिक एसिड मूत्र के माध्यम से बाहर नहीं निकल पाता है, तो यह हमारे रक्त में ही इकट्ठा होने लगता है. यह यूरिक हमारी किडनियों और जोड़ों में इकट्ठा होकर वहां गठिया, गुर्दों की पथरी और खराबी जैसे लक्षण पैदा करता है.

यदि यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाये, तो इस स्थिति को हाइपरयूरिसीमिया (Hyperuricemia) कहा जाता है. इससे गठिया, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, गुर्दों में पथरी और गुर्दों की खराबी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती है. अत: ऊपर बताये गये लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत यूरिक एसिड की जांच करा कर डॉक्टर से मिलें.

डॉ एस कुमार

शिशु रोग विशेषज्ञ,

रेनबो क्लीनिक, हटिया

मो.: 7250725044

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