कलाई पर बंधी राखी आखिर कब उतारनी चाहिए? जानिए सही समय और इससे जुड़ी मान्यता

When to Remove Rakhi: रक्षाबंधन के बाद राखी को लेकर अक्सर मन में यही सवाल आता है कि इसे कब उतारना चाहिए और उतारने के बाद इसका क्या करना सही होता है. अगर आपके मन में भी इसे लेकर कोई कन्फ्यूजन है, तो इस आर्टिकल में जानिए राखी उतारने से जुड़ी आसान बातें, जिन्हें जानना आपके लिए काफी जरूरी है.

When to Remove Rakhi: रक्षाबंधन का यह त्योहार सिर्फ भाई की कलाई पर रेशम का धागा बांधने का दिन नहीं होता है, बल्कि यह भाई बहन के उस खट्टे मीठे और कभी न टूटने वाले प्यार का जश्न मनाने का मौका होता है. इस दिन सभी बहनें बहुत ही प्यार से अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की दुआ भगवान से मांगती हैं. वहीं, भाई भी जीवन भर हर मोड़ पर अपनी बहन का साथ निभाने का पक्का वादा करते हैं. लेकिन जैसे ही त्योहार खत्म होता है, कलाई पर बंधी इस राखी को लेकर सबसे बड़ा सवाल जो मन में आता है, वह यह है कि इसे कब तक बांधकर रखना चाहिए? इसे हटाने का सही समय और दिन कौन सा होता है? आज इस आर्टिकल में हम इसी तरह के कुछ बहुत ही कॉमन सवालों का जवाब बहुत ही आसान तरीके से आपको देने जा रहे हैं. जब आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़ लेंगे, तो आपके दिमाग से कई तरह के सवाल खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगे.

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राखी उतारने का सही समय क्या है?

धार्मिक मान्यताओं और हमारी परंपराओं में परंपराओं में राखी उतारने के अलग-अलग आसान तरीके बताए गए हैं. आप अपनी पसंद और घर के रिवाजों के हिसाब से इनमें से कोई भी समय चुन सकते हैं.

  • अगले दिन या 24 घंटे बाद: बहुत से घरों में नियम होता है कि रक्षाबंधन खत्म होने के 24 घंटे बाद यानी अगले दिन राखी उतारी जा सकती है.
  • कृष्ण जन्माष्टमी के दिन: सबसे ज्यादा मानी जाने वाली बात यह है कि राखी को रक्षाबंधन से लेकर जन्माष्टमी तक बांधकर रखना चाहिए. जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने के बाद आप राखी उतार सकते हैं.
  • पितृ पक्ष शुरू होने से पहले: कुछ लोग राखी को तब तक बांधे रखते हैं जब तक कि पितृ पक्ष शुरू न हो जाए. पितृ पक्ष की शुरुआत से ठीक पहले राखी उतारना अच्छा माना जाता है.

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राखी उतारते समय किन बातों का ध्यान रखें?

राखी सिर्फ एक रेशम का धागा नहीं है, इसमें आपकी बहन का प्यार और दुआएं जुड़ी होती हैं. इसलिए इसे उतारते समय ये छोटी-छोटी बातें जरूर ध्यान में रखें.

  • कैंची या चाकू का इस्तेमाल न करें: राखी खोलते समय कभी भी कैंची, ब्लेड या चाकू जैसी धारदार चीजों का इस्तेमाल न करें. अगर गांठ ज्यादा पक्की हो गई है, तो उसे आराम से हाथों से खोलने की कोशिश करें.
  • झटके से न तोड़ें: राखी को कभी भी खींचकर या जोर लगाकर नहीं तोड़ना चाहिए.
  • इधर-उधर या कचरे में न फेंकें: उतरी हुई राखी को कभी भी डस्टबिन में, सड़क पर या घर के किसी कोने में ऐसे ही नहीं फेंकना चाहिए. ऐसा करना बहुत ही गलत माना जाता है.

उतारी हुई राखी का बाद में क्या करें?

कलाई से राखी उतारने के बाद उसे सही जगह पर संभालना या विसर्जित करना बहुत जरूरी है. आप इनमें से कोई भी आसान तरीका अपना सकते हैं.

  • बहते पानी में डाल दें: मान्यताओं के अनुसार उतरी हुई राखी को किसी साफ नदी, नहर या बहते हुए पानी में बहा देना चाहिए.
  • पेड़ या पौधे के पास रख दें: अगर आसपास पानी की जगह न हो, तो इसे अपने घर के पास किसी पीपल, बरगद या तुलसी के पौधे के नीचे साफ जगह पर रख दें.
  • मिट्टी में दबा दें: आप राखी को अपने घर के किसी गमले या बगीचे की साफ मिट्टी में थोड़ा सा गड्ढा खोदकर दबा भी सकते हैं.
  • संभालकर रख लें: अगर राखी बहुत सुंदर या खास है, तो आप इसे सुखाकर किसी साफ लाल कपड़े या लिफाफे में रखकर अपने मंदिर या अलमारी में संभालकर रख सकते हैं.

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लेखक के बारे में

By सौरभ पोद्दार

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.

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