बिना आग के ठंडे पानी में भी पक जाता है असम का ये Magic Rice, जानें इस चावल में क्या है खास

मैजिक चावल जिसे चोकुवा चावल के नाम से भी जाना जाता है, असम की पाक विरासत का एक हिस्सा है, यह अनोखा चावल शक्तिशाली अहोम राजवंश के सैनिकों का मुख्य भोजन रहा है. इस अनोखे और स्वास्थ्यवर्धक चावल की खेती ब्रह्मपुत्र क्षेत्र के आसपास की जाती है

चावल को बिना पकाए पकाने की कल्पना करें तो कैसा लगेगा? यह एक धोखा जैसा लग सकता है, लेकिन यही चीज़ असम के चोकुवा चावल को इतना जादुई बनाती है. यहां असम के अहोम राजवंश के सबसे अनोखे कब्जे के बारे में जानकारी दी गई है, जिसने हाल ही में अपनी उत्कृष्टता के लिए जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग अर्जित किया है.

मैजिक चावल जिसे चोकुवा चावल के नाम से भी जाना जाता है, असम की पाक विरासत का एक हिस्सा है, यह अनोखा चावल शक्तिशाली अहोम राजवंश के सैनिकों का मुख्य भोजन रहा है. 

इस अनोखे और स्वास्थ्यवर्धक चावल की खेती ब्रह्मपुत्र क्षेत्र के आसपास की जाती है और इसकी खेती असम के कई हिस्सों जैसे तिनसुकिया, धेमाजी, डिब्रूगढ़, लखीमपुर, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, नागांव, मोरीगांव में की जाती है.

चोकुवा चावल मूलतः अर्द्ध चिपचिपा शीतकालीन चावल है, जिसे साली चावल के नाम से जाना जाता है. कम एमाइलोज़ चोकुवा चावल के प्रकारों का उपयोग नरम चावल बनाने के लिए किया जाता है, जिसे कोमल चौल या नरम चावल के रूप में जाना जाता है. चावल को ठंडे या गुनगुने पानी में भिगोने के बाद इस साबुत अनाज का सेवन किया जा सकता है चावल की इस किस्म का उपयोग इसकी तैयारी में आसानी और पोषण मूल्य के कारण व्यापक रूप से किया जाता है.

चावल की इस अनोखी किस्म का सेवन दही, चीनी, गुड़, केले आदि के साथ किया जाता है. इस चावल का उपयोग कई असमिया व्यंजन जैसे पीठे और अन्य स्थानीय व्यंजन बनाने में भी किया जाता है.

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By Shradha Chhetry

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