Student Protest Parents Tips: इन दिनों अलग-अलग मुद्दों को लेकर कई जगह छात्र विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में अगर आपका बेटा या बेटी भी किसी प्रोटेस्ट में शामिल हो रहा है, तो माता-पिता का परेशान होना स्वाभाविक है. मन में कई तरह के सवाल आते हैं- बच्चा सुरक्षित तो है? पढ़ाई का क्या होगा? कहीं किसी परेशानी में तो नहीं पड़ जाएगा? ऐसे समय में गुस्से में डांटने के बजाय बच्चे से शांति से बात करना ज्यादा जरूरी है.
सबसे पहले बच्चे की बात सुनें
अगर बच्चा प्रोटेस्ट में जा रहा है, तो तुरंत उसे रोकने या डांटने के बजाय पूछें कि वह वहां क्यों जाना चाहता है. हो सकता है कि परीक्षा, भर्ती, रिजल्ट या किसी दूसरे मुद्दे को लेकर वह परेशान हो. पहले उसकी बात पूरी सुनें. इससे बच्चे को लगेगा कि घरवाले उसकी परेशानी समझने की कोशिश कर रहे हैं.
हर बात पर बहस करने से बचें
माता-पिता और बच्चों की राय अलग हो सकती है. लेकिन बातचीत को बहस या झगड़े में बदलने से समस्या और बढ़ सकती है. अगर आपको बच्चे की किसी बात से असहमति है, तो अपनी चिंता समझाएं. यह भी बताएं कि आपकी सबसे बड़ी चिंता उसकी सुरक्षा और पढ़ाई को लेकर है.
सुरक्षा को लेकर रहें सतर्क
बच्चा प् में जा रहा है तो उससे जगह, समय और साथ जाने वाले दोस्तों के बारे में जानकारी जरूर लें. फोन चार्ज रखने, जरूरी संपर्क नंबर सेव रखने और किसी अनजान जगह पर अकेले न जाने जैसी सामान्य सावधानियों के बारे में समझाएं. अगर वहां माहौल तनावपूर्ण हो जाए, तो सुरक्षित जगह से हटने को कहें.
पढ़ाई और प्रोटेस्ट में बनाएं बैलेंस
प्रोटेस्ट में शामिल होना बच्चे का फैसला हो सकता है, लेकिन पढ़ाई भी प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखना जरूरी है. बच्चे के साथ मिलकर एक ऐसा Routine बनाएं जिसमें प्रोटेस्ट या उससे जुड़ी गतिविधियों के साथ पढ़ाई के लिए भी समय बचा रहे. इससे उसे दोनों चीजों को संभालने में आसानी होगी.
सोशल मीडिया की हर खबर पर भरोसा न करें
प्रोटेस्ट से जुड़ी कई तरह की वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से फैलती हैं. बच्चे को समझाएं कि किसी भी खबर या दावे को तुरंत सच न मानें. भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी लेने की आदत डालें. लगातार अपडेट्स देखते रहने से तनाव भी बढ़ सकता है, इसलिए बीच-बीच में डिजिटल ब्रेक लेना बेहतर है.
बच्चे को यह एहसास जरूर दें
ऐसे समय में माता-पिता का सबसे बड़ा सहारा बच्चे के लिए यह भरोसा हो सकता है कि “तुम अपनी बात रखो, लेकिन अपनी सुरक्षा और भविष्य का भी ध्यान रखो.” बच्चे को डराने या धमकाने के बजाय उसके साथ खड़े होकर सही और सुरक्षित फैसला लेने में मदद करें.
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