Simple Budget Rule: महीने की शुरुआत में सैलरी आते ही लगता है कि इस बार खर्च सोच-समझकर करेंगे और कुछ पैसे बचा भी लेंगे. लेकिन महीने का आखिरी हफ्ता आते-आते अकाउंट का बैलेंस देखकर समझ नहीं आता कि पैसे आखिर गए कहां. छोटी-छोटी खरीदारी, ऑनलाइन ऑर्डर, बाहर की चाय-कॉफी और बिना प्लान की शॉपिंग मिलकर बजट बिगाड़ देती हैं. ऐसे में एक आसान बजट रुल अपनाकर आप अपने खर्च को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं.
पहले 3 हिस्सों में बांटें अपनी Income
बजट बनाने का सबसे आसान तरीका है कि महीने की आमदनी को तीन हिस्सों में बांटकर देखें. एक हिस्सा जरूरी खर्चों के लिए, दूसरा बचत के लिए और तीसरा अपनी पसंद या मनोरंजन से जुड़े खर्चों के लिए रखें. प्रतिशत हर व्यक्ति की आमदनी और जिम्मेदारियों के हिसाब से अलग हो सकता है. इसलिए किसी एक तय फॉर्मूले को जबरदस्ती अपनाने के बजाय अपनी स्थिति के अनुसार बजट बनाएं.
सबसे पहले जरूरी खर्च अलग करें
किराया, बिजली-पानी का बिल, राशन, यात्रा, EMI या दूसरे जरूरी भुगतान महीने की शुरुआत में ही नोट कर लें. इन खर्चों को पहले अलग रखने से बाद में अचानक पैसे कम पड़ने की परेशानी कम हो सकती है.
बचत को आखिरी में न छोड़ें
अक्सर हम सोचते हैं कि महीने के अंत में जो पैसा बचेगा, उसे सेव कर लेंगे. लेकिन ऐसा ज्यादातर बार हो नहीं पाता. बेहतर है कि Income आते ही अपनी क्षमता के मुताबिक एक तय रकम अलग खाते या सेविंग के लिए रख दें. इसे रोजमर्रा के खर्च में शामिल न करें.
छोटे खर्चों पर रखें नजर
एक कप कॉफी, खाना मंगवाना, ऑनलाइन खरीदारी या छोटी-छोटी बिना सोचे की गई खरीदारी अकेले बहुत बड़ी नहीं लगती. लेकिन पूरे महीने में इन्हीं खर्चों की रकम अच्छी-खासी हो सकती है. इसलिए हर छोटा खर्च लिखने की आदत डालें. इसके लिए मोबाइल के नोट्स या किसी आसान खर्च लिखने वाले ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है.
मन का खर्च भी रखें बजट में
बजट का मतलब यह नहीं कि हर चीज पर रोक लगा दें. घूमना, बाहर खाना या अपनी पसंद की कोई चीज खरीदना भी जरूरी हो सकता है. बस इसके लिए पहले से एक छोटी रकम तय कर लें. इससे खर्च करने के बाद पछतावा भी कम होगा और बजट भी पूरी तरह नहीं बिगड़ेगा.
महीने में एक बार करें हिसाब
महीने के आखिर में सिर्फ 10-15 मिनट बैठकर देखें कि किस चीज पर कितना खर्च हुआ. अगर किसी category में जरूरत से ज्यादा पैसा चला गया है, तो अगले महीने वहां थोड़ी कटौती करें. धीरे-धीरे आपको समझ आने लगेगा कि आपका पैसा कहां जा रहा है और कहां बचत की गुंजाइश है. याद रखें, अच्छा बजट वह नहीं जिसमें हर खर्च रोक दिया जाए, बल्कि वह है जिसमें खर्च, बचत और जरूरतों के बीच सही संतुलन बनाया जा सके.
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