Right Age for Pocket Money: बच्चों की परवरिश में अच्छी आदतें सिखाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उन्हें पैसों की अहमियत समझाना. आज के समय में कई माता-पिता इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि बच्चों को पॉकेट मनी कब से देनी चाहिए.
कुछ लोग बहुत जल्दी पैसे देने लगते हैं, जबकि कुछ तब तक इंतजार करते हैं जब तक बच्चा बड़ा न हो जाए. ऐसे में सही उम्र और सही तरीका जानना जरूरी है ताकि बच्चा पैसे की कीमत भी समझे और उन्हें जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना भी सीखे.
Right Age for Pocket Money: किस उम्र से देनी चाहिए पॉकेट मनी?
आमतौर पर 6 से 8 साल की उम्र के बाद बच्चों को थोड़ी-सी पॉकेट मनी दी जा सकती है. इस उम्र में बच्चे पैसों की बेसिक समझ विकसित करने लगते हैं. वे यह जानने लगते हैं कि किसी चीज को खरीदने के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं और पैसे सीमित होते हैं. शुरुआत में बहुत ज्यादा रकम देने की जरूरत नहीं होती. छोटी राशि से शुरुआत करें ताकि बच्चा धीरे-धीरे बचत और खर्च के बीच का फर्क समझ सके.
पॉकेट मनी देने का सही तरीका क्या है?
पॉकेट मनी का उद्देश्य सिर्फ बच्चे की इच्छाएं पूरी करना नहीं, बल्कि उसे आर्थिक जिम्मेदारी सिखाना भी होना चाहिए. इसलिए तय समय पर एक निश्चित रकम दें. हर छोटी मांग पर अलग से पैसे देने की आदत बनाने से बचें.
अगर बच्चा किसी बड़ी चीज के लिए पैसे बचाना चाहता है, तो उसे बचत करने के लिए प्रोत्साहित करें. इससे उसमें धैर्य और प्लान बनाकर खर्च करने की आदत डेवलप होगी.
किन बातों का रखें ध्यान?
पॉकेट मनी (Right Age for Pocket Money) देते समय कुछ आसान नियम पहले से तय कर लें. जैसे पैसे एक बार खत्म हो जाएं तो उसी हफ्ते या महीने में दोबारा अतिरिक्त पॉकेट मनी न दें. इससे बच्चा अपने खर्चों की प्लान बनाना सीखेगा. साथ ही, बच्चे से समय-समय पर यह जरूर पूछें कि उसने पैसे कहां खर्च किए. इसका मतलब उसकी निगरानी करना नहीं, बल्कि उसे सही फैसले लेने के लिए मार्गदर्शन देना है.
बच्चे को बचत की आदत भी सिखाएं
सिर्फ पैसे देना काफी नहीं है. बच्चे को यह भी बताएं कि कमाई, खर्च और बचत तीनों का संतुलन जरूरी होता है. उसके लिए एक छोटी गुल्लक या सेविंग बॉक्स रखें और उसे हर बार कुछ पैसे बचाने के लिए मोटिवेट करें. जब बच्चा अपनी बचत से कोई पसंदीदा चीज खरीदेगा, तो उसे पैसों की असली कीमत समझ आएगी.
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