दूसरों के सामने बोलने से घबराता है बच्चा? इन 5 तरीकों से दूर करें उसका डर और झिझक

Parenting Tips: अगर आपका बच्चा घर पर खूब बातें करता है, लेकिन दूसरों के सामने आते ही चुप हो जाता है, तो आपको उसकी इस झिझक को समझने की जरूरत है. कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप उसके अंदर का डर कम कर सकते हैं और उसका कॉन्फिडेंस बढ़ा सकते हैं.

Parenting Tips: अक्सर आपने यह देखा होगा कि आपका बच्चा घर पर बहुत बातें करता है. लेकिन जब मेहमान आते हैं या वह किसी बाहरी व्यक्ति से मिलता है, तो एकदम चुप हो जाता है. चाहे स्कूल में क्लास के सामने खड़े होकर कोई स्पीच देनी हो या फिर टीचर के सवालों का जवाब देना हो, घबराहट के मारे उसकी हवा ही निकल जाती है. क्या आप भी उस पल को देखकर उदास हो जाते हैं जब आपका बच्चा मेहमानों के सामने एकदम चुप हो जाता है, जैसे उसके शब्द कहीं खो गए हों? अगर आपके बच्चे के साथ भी ऐसा ही हो रहा है, तो आपको यह समझना होगा कि न तो आप अकेले हैं और न ही यह कोई बीमारी है. ऐसा होने के पीछे सबसे बड़ा कारण है आपके बच्चे के अंदर का डर और उसमें आत्मविश्वास की कमी. आप कुछ आसान बातों का ख्याल रखकर अपने बच्चे के अंदर के डर और आत्मविश्वास की इस कमी को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं. आज इस आर्टिकल में हम आपको इन्हीं उपायों के बारे में विस्तार से बताएंगे.

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तुलना से बचें: अपने बच्चे के आत्मविश्वास को कैसे बढ़ाएं

आपको खुद यह बात सबसे पहले समझनी होगी कि हर बच्चा अपने आप में अलग होता है. अक्सर पैरेंट्स दूसरों के सामने यह कह तो देते हैं कि "यह बहुत शर्मीला है, किसी से बात ही नहीं करता" या फिर कह देते हैं कि "देखो शर्मा जी का बेटा कितना स्मार्ट है और अपनी बातों को बेझिझक बोलता है." लेकिन जब आप ऐसा करते हैं, तो आपके बच्चे के दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि वह कमजोर है और कोई भी बात सही से नहीं बोल सकता है. एक बार एक बच्चे को उसके माता-पिता लगातार पड़ोसी के बच्चे से "तुम उससे क्यों नहीं सीख लेते, देखो वह कितना अच्छा बोलता है" कहकर तुलना करते थे. कुछ समय बाद उस बच्चे ने बोलना ही कम कर दिया क्योंकि उसे लगने लगा कि वह कभी भी उस बच्चे की तरह अच्छा नहीं बोल पाएगा. अपने बच्चे की तुलना दूसरों से करने से बेहतर होगा कि जब भी वह थोड़ा सा भी कुछ कहने की कोशिश करे, तो उसकी तारीफ जरूर करें.

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घर में खुला माहौल: बच्चे को दिल खोलकर बोलना सिखाएं

आपका बच्चा सबसे पहले बातचीत करना अपने घर से ही सीखता है. ऐसे में आपके घर का माहौल ऐसा होना चाहिए जहां आपका बच्चा अपने दिल की बातों को बिना किसी झिझक और डर के कह सके. हर शाम अपने बच्चे से पूछें कि आज स्कूल में क्या-क्या हुआ और उसने कौन-कौन सी नयी चीजें सीखीं. जब आपका बच्चा अपनी बातें आपके साथ शेयर करे, तो अपना फोन साइड में रखकर उसकी बातों को ध्यान से सुनें. आपको अपने बच्चे को यह महसूस कराना है कि आप उसकी बातों को वैल्यू दे रहे हैं. जब उसे घर में सुनने वाला मिलेगा, तो बाहर भी उसका बोलने का हौसला बढ़ेगा.

छोटे-छोटे कामों के जरिए उसका झिझकना दूर करें

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा सिर्फ घर पर ही नहीं बल्कि बाहर वालों के सामने भी बिना डरे और झिझके बात कर सके, तो उसे छोटे-छोटे मौके देना शुरू कर दें.

  • जब भी आपके घर में कोई मेहमान आए, तो अपने बच्चे से कहें कि जाओ पानी लेकर आओ और उनसे उनका हाल-चाल भी पूछ लो.
  • जब आप पास की किसी दुकान पर जाएं, तो अपने बच्चे से कहें कि वह दुकानदार से सामान मांगे और पैसे भी खुद दे.

एक परिवार में, माता-पिता ने अपने बच्चे को यह जिम्मेदारी दी कि वह घर आए मेहमानों का स्वागत करे, पानी दे और उनसे बातें करे. धीरे-धीरे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ा और वह अब मेहमानों के आने पर उत्साहित होता है. जब बच्चा खुद यह सब करने लगेगा, तो अजनबियों से बात करने का उसका डर अपने आप खत्म होने लगेगा.

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गलती होने पर सबके सामने डांटने या टोकने से बचें

अगर आपका बच्चा किसी के सामने बात करते समय कोई गलती कर दे या फिर किसी जगह पर अटक जाए, तो आपको कभी भी तुरंत उसे दूसरों के सामने ही न तो सुधारना चाहिए और न ही उसका मजाक उड़ाना चाहिए. अगर आप उसे सबके सामने डांटेंगे, तो अगली बार से वह बोलने की हिम्मत ही नहीं कर पाएगा. अगर आपके बच्चे ने कुछ गलत बोल भी दिया है, तो जब सभी मेहमान चले जाएं या आप दोनों अकेले हों, तब उसे प्यार से समझाएं कि सही तरीका क्या है. जब आप ऐसा करेंगे तो उसका खुदपर से भरोसा टूटेगा नहीं.

खेल-खेल में बातें करना सिखाएं यानी रोल-प्ले

छोटे बच्चों को खेल-खेल में चीजें सिखाना सबसे ज्यादा आसान होता है. उदाहरण के लिए, आप खुद एक दुकानदार बन जाएं और अपने बच्चे को ग्राहक बनने के लिए कहें, या फिर आप खुद टीचर बन जाएं और अपने बच्चे को स्टूडेंट बना दें. इस छोटे से गेम या फिर रोल-प्ले के ज़रिये उसे सिखाएं कि उसे दूसरों से बात करने की शुरुआत कैसे करनी है, नमस्ते या फिर हेलो कैसे कहना है और अपनी बातों को दूसरों के सामने कैसे रखना है. जब उसे घर पर इन चीजों को प्रैक्टिस करने का मौका मिलेगा, तो बाहर जाकर दूसरों के सामने बोलना उसके लिए काफी ज्यादा आसान हो जाएगा.

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By सौरभ पोद्दार

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.

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