क्या सूर्यास्त देखने से सच में तनाव कम हो सकता है? जानें क्या है ‘Sunset Awe’

शाम का सूरज डूबते देखना सिर्फ आंखों को अच्छा लगने वाला नजारा नहीं है. प्रकृति का यह खूबसूरत पल मन को कुछ देर के लिए सुकून दे सकता है. जानिए ‘Sunset Awe’ क्या है और सूर्यास्त देखने से तनाव, मूड और नींद पर क्या असर पड़ सकता है.

Sunset Awe: शाम के समय आसमान में बदलते रंग और धीरे-धीरे डूबता सूरज देखने में जितना खूबसूरत लगता है, उतना ही यह पल मन को भी सुकून दे सकता है. दिनभर की भागदौड़, काम का तनाव और लगातार फोन चलाने के बाद कुछ मिनट प्रकृति को देखना दिमाग को आराम देने का एक आसान तरीका हो सकता है. इसी तरह के अनुभव को मनोविज्ञान में ‘Awe’ यानी विस्मय से जोड़ा जाता है.

क्या है Sunset Awe?

जब हम कोई ऐसा दृश्य देखते हैं जो हमें बहुत बड़ा, खूबसूरत या खास महसूस होता है, तो मन में ‘Awe’ की भावना पैदा हो सकती है. सूर्यास्त भी ऐसा ही अनुभव दे सकता है. ढलते सूरज और आसमान के बदलते रंगों को देखकर कुछ समय के लिए हमारा ध्यान रोजमर्रा की परेशानियों से हटकर उस खूबसूरत पल पर टिक जाता है.

इससे व्यक्ति को अपनी चिंताएं थोड़ी छोटी और आसपास की दुनिया ज्यादा बड़ी महसूस हो सकती है. हालांकि, सूर्यास्त देखना किसी मानसिक बीमारी का इलाज नहीं है, लेकिन यह तनाव कम करने और मन को शांत करने वाली एक अच्छी आदत हो सकती है.

तनाव और बेचैनी में मिल सकता है सुकून

दिनभर काम और जिम्मेदारियों के बीच दिमाग लगातार व्यस्त रहता है. ऐसे में शाम को कुछ मिनट फोन से दूर रहकर सूर्यास्त देखना रिलैक्स करने में मदद कर सकता है. प्रकृति के शांत माहौल में समय बिताने से मन को ब्रेक मिलता है और मूड बेहतर महसूस हो सकता है.

नींद के लिए भी हो सकता है फायदेमंद

शाम होते ही प्राकृतिक रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगती है. यह हमारे शरीर की प्राकृतिक घड़ी यानी बॉडी क्लॉक के लिए एक संकेत है कि अब रात होने वाली है. शाम की प्राकृतिक रोशनी में समय बिताना और रात में तेज स्क्रीन लाइट कम रखना सोने की दिनचर्या को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है.

रोज कितना समय दें?

इसके लिए किसी खास नियम की जरूरत नहीं है. शाम को 10-15 मिनट बालकनी, छत, पार्क या किसी खुले स्थान पर बैठकर आसमान को देख सकते हैं. इस दौरान फोन को थोड़ा दूर रखें और बस कुछ देर उस पल को महसूस करें.

अगर लगातार उदासी, चिंता या तनाव बना रहता है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो केवल सूर्यास्त देखने पर निर्भर रहने के बजाय किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.

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