घर में मौजूद ये 4 चीजें बन सकती हैं फेफड़ों के कैंसर की वजह, जानें कैसे बचें

हम अक्सर बाहरी प्रदूषण की चिंता करते हैं, लेकिन असली खतरा घर के अंदर भी हो सकता है. रसोई का धुआं, सिगरेट का धुआं, अगरबत्ती और रेडॉन गैस फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकते हैं. जानें इन छिपे खतरों से बचने के सरल उपाय.

डॉ. मनुजेश बंद्योपाध्याय, कंसल्टेंट - थोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी, नारायणा हॉस्पिटल, हावड़ा

बाहर की प्रदूषित हवा को लेकर हम अक्सर चिंतित रहते हैं, लेकिन असली खतरा हमारे अपने घर के अंदर भी हो सकता है. पूजा घर हो, रसोई हो या गैराज, इन जगहों की अच्छी तरह सफाई कुछ महीनों में एक बार जरूर करनी चाहिए, क्योंकि हम अपना ज्यादातर समय यहीं बिताते हैं.

डॉक्टरों के अनुसार, घर के अंदर मौजूद इन अदृश्य प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.

रसोई का धुआं

खाना बनाते समय, खासकर तलते समय या तेज आंच पर पकाते समय, रसोई में हवा का आना-जाना बना रहना चाहिए. चाहे आप गैस पर खाना बनाएं या इंडक्शन पर, खिड़की खुली रखें ताकि धुआं कमरे में जमा न हो, क्योंकि सांस के साथ यह शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

ज्यादातर रसोइयों में एग्जॉस्ट फैन या चिमनी लगी होती है. खाना बनाते समय, खासकर तलने या तेज आंच वाले पकवान बनाते समय इनका इस्तेमाल जरूर करें. साथ ही, कालिख जमा होने से रोकने के लिए हर छह महीने में एक बार रसोई के कोनों की अच्छी तरह सफाई करवाना न भूलें.

घर में किसी सदस्य के धूम्रपान से होने वाला खतरा

पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरे व्यक्ति के सिगरेट के धुएं के संपर्क में आना एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनमें कोई सदस्य धूम्रपान करता है. आप खुद सिगरेट न पीते हों, फिर भी लगातार तंबाकू के धुएं में सांस लेने से शरीर हानिकारक रसायनों और कार्सिनोजन के संपर्क में आता है.

लंबे समय तक ऐसा होने से फेफड़ों के कैंसर के साथ-साथ दूसरे तरह के कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, सांस से जुड़ी समस्याएं और फेफड़ों की क्षमता कम होने जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं. बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग इसके प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं.

अगर परिवार में कोई धूम्रपान करता है, तो उसे इसे छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करें और घर को पूरी तरह धुआं-मुक्त रखने की कोशिश करें. परिवार को तंबाकू के धुएं से बचाना कैंसर की रोकथाम की दिशा में एक छोटा लेकिन असरदार कदम है.

मच्छर भगाने वाली कॉइल और अगरबत्ती

ज्यादातर भारतीय घरों में मच्छर भगाने वाली कॉइल और अगरबत्ती का इस्तेमाल आम बात है. पूजा के दौरान हो, आदतन हो या फिर कीड़े-मकौड़ों को दूर रखने के लिए, इनका इस्तेमाल अक्सर किया जाता है. इनसे निकलने वाले बहुत छोटे कणों के लंबे और ज्यादा संपर्क में रहने से समय के साथ कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.

इसका मतलब यह नहीं है कि इनका इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया जाए. बस इतना ध्यान रखें कि इनका इस्तेमाल हवादार जगह पर हो, ताकि धुआं सांस के साथ शरीर में न जाए. कॉइल जलाते समय बच्चों और सांस से जुड़ी बीमारी से परेशान बुजुर्गों को इससे दूर रखें. पूजा घर या छोटे कमरों में धुआं जमा होने से रोकने के लिए पंखे या एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करें। चाहें तो किसी भरोसेमंद ब्रांड की धुआं-रहित अगरबत्ती या कॉइल भी एक विकल्प हो सकती है.

घर में रेडॉन गैस

एक और खामोश खतरा है रेडॉन गैस, जो बेसमेंट की दरारों या इमारत की नींव में मौजूद दरारों, जैसे कंक्रीट की दीवारों, फर्श, निर्माण के जोड़, फ्लोर ड्रेन और पाइप के आसपास की खाली जगह से रिसकर घर के अंदर पहुंच सकती है. रेडॉन एक शक्तिशाली कार्सिनोजन है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है. यह धूम्रपान करने वालों और न करने वालों, दोनों के लिए समान रूप से घातक है.

हर आठ से दस साल में घर की संरचना की जांच करवाएं और जहां भी जरूरत हो, वहां मरम्मत करवाएं. आपका घर आपकी सुरक्षित जगह होनी चाहिए, न कि ऐसी जगह जिसकी नींव ही आपके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाए.

छोटे बदलाव, कम जोखिम

हर भारतीय घर में कुछ न कुछ जोखिम मौजूद रहता है. इसलिए जरूरी यह है कि लोगों को इन छिपे खतरों के बारे में जागरूक किया जाए और उन्हें ऐसे बदलावों के बारे में बताया जाए, जिनसे घर के अंदर मौजूद प्रदूषण से बचा जा सके और फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम किया जा सके.

घर की उन चीजों को हटाने की जरूरत नहीं है, जिनसे आपको लगाव है. बस खाना बनाते समय खिड़की खुली रखना, एग्जॉस्ट फैन चालू रखना और कॉइल या अगरबत्ती को थोड़ी खुली जगह पर जलाना- ये छोटी-छोटी आदतें हवा में मौजूद बहुत छोटे कणों को काफी हद तक कम कर सकती हैं और साथ ही कैंसर के खतरे को भी कम कर सकती हैं. आपका घर वह जगह बने, जहां आप सुकून की सांस लें, न कि वह जगह जहां सांस लेने से भी डर लगे.

यह भी पढ़ें: फेफड़ों में कैंसर होने के बावजूद क्यों नहीं दिखते लक्षण? डॉक्टर ने समझाया कारण


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By पुष्पांजलि

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