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World Diabetes Day 2021: क्या है मधुमेह संकट, मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित कर रहा डायबिटीज, क्या हैं उपाय ?

डायबिटीज से पीड़ित लोगों के शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव हो रहा हो तो उन्हें निश्चित डाइट रूटीन का पालन करना जरूरी हो जाता है. डायबिटीज के मरीज अक्सर चिड़चिड़ापन, आक्रामक या थकान महसूस करते हैं.

By Prabhat khabar Digital
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World Diabetes Day 2021: डायबिटीज को हार्ट संबधी रोगों, स्ट्रोक से लेकर किडनी तक की कई बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने के लिए जाना जाता है, वहीं मेटाबोलिक डिस्ऑर्डर का मेंटल हेल्थ पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. डायबिटीज से निपटने के लिए नियमित रूप से दवा लेने से कहीं अधिक जरूरत है सही समय पर सही मात्रा में सही भोजन करना और हर समय अपने शुगर लेवल के प्रति अलर्ट रहना. शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव के कारण व्यक्ति को कई बार चिड़चिड़ापन भी महसूस होता है, जो सामान्य रूप से लोगों के साथ उनके संबंधों को प्रभावित करता है.

डॉक्टर्स कहते हैं किसी भी तरह के हेल्थ कॉम्प्लिकेशन आपके मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर सकती है. इसी तरह, डायबिटीज भी अपने साथ बहुत सारे मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को लाता है जिसे मधुमेह संकट के रूप में जाना जाता है और आपके मूड पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. बढ़ते-घटते शूगर लेवल के कारण मूड स्विंग्स होता रहता है.

मधुमेह रोगियों में होने वाली आम मानसिक समस्याएं

कुछ मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां हैं जो शुगर लेवल में असंतुलन के कारण आती हैं जैसे कम एनर्जी, सुस्ती, चिंता और जलन आदि होना. डॉक्टर कहते हैं, "हाइपरग्लेसेमिया में, रोगी उत्साह का अनुभव कर सकता है, जबकि हाइपोग्लाइसीमिया में, रोगी को ऊर्जा की कमी महसूस होती है और वह चिड़चिड़ा हो जाता है. हालांकि डायबिटीज मरीजों द्वारा अनुभव किए जाने वाले मिजाज आमतौर पर स्थायी नहीं होते हैं और शूगर लेवल के सामान्य होने पर गायब भी हो जाते हैं, इन लक्षणों को पूर्ण विकसित अवसाद (full-blown depression) में बदलने से रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए.

मधुमेह संकट क्या है?

मधुमेह संकट एक ऐसा शब्द है जिसका प्रयोग अक्सर मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए किया जाता है. यह एक ऐसी स्थिति है जहां एक व्यक्ति तनाव, चिंता, अपराधबोध, आत्म-प्रबंधन में असमर्थता और अवसाद जैसी विभिन्न भावनाओं का अनुभव करता है. मानसिक परेशानी में रहने वाले डायबिटीज के मरीज की अंधापन, स्ट्रोक, जीवन की गुणवत्ता में कमी, प्री मेच्योर डेथ आदि का शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है.

मधुमेह संकट से बचने के उपाय

बैलेंस्ड और मेंटन डाइट: संतुलित, नियमित और समय पर आहार के साथ, व्यक्ति शूगर लेवल पर नियंत्रण रख सकता है.

फिजिकल एक्टिविटी और एक्सरसाइज: एक सुस्त जीवन शूगर के लेवल को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है इसलिए सक्रिय रहना और नियमित रूप से व्यायाम करना शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित कर सकता है.

सपोर्ट ग्रुप: टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों के लिए सपोर्ट ग्रुप उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं क्योंकि उन्हें सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील वातावरण में अपनी भावनाओं को साझा करने के लिए एक मंच मिलता है.

देखभाल करने वाले का समर्थन: पारिवारिक वातावरण प्रेमपूर्ण और सहायक होने से डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों के जीवन की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद कर सकता है.

परिवार और दोस्त: परिवार और दोस्तों की मदद से मधुमेह के संकट से लड़ा जा सकता है.

आध्यात्मिकता: आध्यात्मिक साधनाओं को अपनाने से जीवन की बेहतर गुणवत्ता और सकारात्मक भावनात्मक भलाई दिखाई देती है.

दवाएं: उचित दवाएं और अपने शूगर के लेवल की निरंतर जांच रखने से शर्करा के लेवल को सामान्य सीमा के भीतर बनाए रखने में मदद मिलती है.

धैर्य रखना: डायबिटीज से निपटने के दौरान धैर्य रखें. याद रखें छोटे बदलाव, निरंतर प्रयास और दृढ़ता अप्रत्याशित परिणाम ला सकती है लेकिन इसमें समय लगता है. प्रक्रिया को जल्दी करने से केवल तनाव, चिंता और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं.

डायबिटीज सेल्फ मैनेजमेंट प्रोग्राम: मधुमेह संकट का शिकार होने से बचने के लिए, सेल्फ मैनेजमेंट बहुत मदद कर सकती है. ट्रेनर की मदद से सही वजन बनाए रखें और सही डाइट प्लान को फॉलो करें. ये प्रयास और छोटी-छोटी उपलब्धियां डायबिटीज को नॉर्मल करने में आपका आत्मविश्वास बढ़ा सकती हैं. इसलिए सेल्फ मैनेजमेंट प्रोग्राम एक स्वस्थ जीवन शैली की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकता है.

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