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National Nutrition Week 2020 : झारखंड में पाए जाने वाले रूगड़ा, खुखड़ी, पालक, पोइ, गंधारी साग में है पौष्टिक का खजाना, जानें प्रति व्यक्ति कितनी मात्रा में करे सेवन

By Prabhat khabar Digital
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Jharkhand's plate is full of nutrition,
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National Nutrition Week 2020, Jharkhand, foods, Health News : झारखंडी खान-पान को पोषण युक्त आहार की श्रेणी में शामिल किया गया है. इसका कारण है झारखंड में उपलब्ध गंधारी साग, पालक साग, पोइ साग, बेंग साग. इन साग में अत्यधिक मात्रा में पोषण तत्व जैसे कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, विटामिन सी आदि पाये जाते हैं. इन पोषक तत्वों की शरीर में सही समय पर उपलब्धता हाे जाये, तो हार्मोन के विकास में मदद मिलती है़ एनीमिया (खून की कमी) की शिकायत दूर होती है़ हड्डियां मजबूत होती हैं. खास तौर पर बरसात में पाये जाने वाला रूगड़ा, खुखड़ी और बांस करील से शरीर में प्रोटीन, फैट, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बनाये रखने में मदद मिलती है..

फायदेमंद है 'रूगड़ा' व देसी मशरूम 'खुखड़ी'

बरसात के मौसम में मिलनेवाला देसी मशरूम (खुखड़ी) व रूगड़ा शरीर के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक है. न्यूट्रिशियनिस्ट के अनुसार खुखड़ी में प्रोटीन, फैट, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट की प्रचुरता है़ 100 ग्राम खुखड़ी में 3.68 प्रोटीन, 0.42 ग्राम फैट, 3.11 ग्राम फाइबर और 1.98 ग्राम कार्बोहाइड्रेट मिलता है. वहीं रूगड़ा में कैल्सियम और प्रोटीन मिलते हैं. एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित मरीज रूगड़ा का सेवन करे, तो तेजी से खून की मात्रा बढ़ती है. वहीं दिल के मरीज, ब्लड प्रेशर और मधुमेह रोगी रूगड़ा और खुखड़ी का नियमित सेवन करें, तो उनके स्वास्थ्य में सुधार आता है.

गंधारी साग

झारखंड के अलावा अन्य राज्यों में चौलाई का साग कहा जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट, फॉस्फोरस, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन-ए, मिनिरल और आयरन प्रचूर मात्रा में उपलब्ध होता है. शरीर में विटामिन की कमी को दूर करने के साथ-साथ कफ और पित्त का नाश करने में मददगार है. इसके अलावा आंख की समस्या, खून साफ करने, बाल का असमय सफेद होने से बचाने, मांसपेशियों के निर्माण और शरीर को ऊर्जा देती है. अार्थराइटिस, बुखार और हृदय रोगी के लिए यह साग लाभप्रद है.

बांस करील

इसमें कैल्शियम की मात्रा अत्यधिक मात्रा में होने से हड्डियों को मजबूती मिलती है. इसके अलावा इसमें फाइबर की मात्रा होने से रक्त संचार को लाभ मिलता है.

सहजन साग

इसके प्रति 100 ग्राम में विटामिन ए 6780 माइक्रो ग्राम, विटामिन सी 220 माइको ग्राम, आयरन 0.85 मिग्रा, प्रोटीन 6.7 ग्राम, कैल्शियम 440 मिग्रा और 92 कैलोरी पायी जाती है. यह साग रक्त चाप से पीड़ित रोगी के लिए लाभदायक है.

पालक साग

प्रति 100 ग्राम में पालक साग में विटामिन ए 5580 मिग्रा, विटामिन सी 28 मिग्रा, आयरन 10.9 मिग्रा, प्रोटीन दो मिग्रा, कैल्शियम 73 मिग्रा और 26 कैलोरी पायी जाती है. इसके नियमित सेवन से आंखों की समस्या, खून की कमी दूर होती है.

मड़ुआ या रागी

प्रति 100 ग्राम रागी में विटामिन ए 42 माइक्रो, आयरन 3.9 मिग्रा, प्रोटीन 3.7 ग्राम, कैल्शियम 344 मिग्री और 328 कैलोरी पायी जाती है. इसके नियमित सेवन से शरीर की हड्डियाें को मजबूती मिलती है.

हर व्यक्ति को प्रतिदिन 1200-1800 कैलोरी की जरूरत

हर व्यक्ति को प्रतिदिन 1200-1800 कैलोरी की आवश्यकता होती है, लेकिन यह उस व्यक्ति की मेहनत व काम करने के हिसाब से अलग-अलग हाे सकता है. विशेषज्ञाें के अनुसार पौष्टिक खानपान से ही कैलोरी ऊर्जा के रूप मिलती है. संतुलित आहार से ही शरीर का विकास होता है. रोग सेे लड़ने की क्षमता तैयार होती है. पर्याप्त कैलोरी अनाज, सब्जी व फल से प्राप्त होती है. सब्जी व फल में विटामिन, खनिज व फाइबर प्राप्त होता है. वहीं दूध व दूध से बने खाद्य पदार्थ शरीर को खनिज पदार्थ व प्रोटीन प्रदान करते हैं, जो शरीर के लिए जरूरी है.

1800 कैलोरी के हिसाब से ऐसा हो डाइट

ब्रेकफास्ट (400-500 कैलोरी) : रोटी, एक कटोरी सब्जी (मौसमी सब्जी), दही व एक फल

लंच (400 कैलोरी) : आधा कटोरी चावल, दो रोटी, एक कटोरी सब्जी, एक कटाेरी दाल, रायता व सलाद. (शाकाहारी- पनीर या सोयाबीन, मंशाहारी-अंडा या मछली)

डीनर (300-350 कैलोरी) : तीन रोटी, एक कटोरी दाल, एक कटोरी सब्जी व सेवई या खीर (सेवई व खीर नहीं लेने वाले हल्दी-दूध लें)

नोट: ब्रेकफास्ट व लंच के बीच में डाभ का पानी या स्प्राउट को शामिल करें. स्प्राउट में नींबू का उपयोग कर सकते हैं. वहीं शाम चार से पांच के बीच में चाय, बिस्किट व बादाम या अखरोट को शामिल करें. इस दोनों से हमें 250 तक कैलोरी मिल जाती है.

विशेषज्ञ ने कहा..

संतुलित आहार से ही हमारा सही से पोषण हो पाता है. अनाज के अलावा सब्जी व फल के अलावा दूध व उससे बने खाद्य पदार्थ को शामिल करना चाहिए. अंकुरित अनाज को शामिल करना बेहतर होता है. 1800 कैलोरी को ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर में बांटा जाता है, जिसके हिसाब से खाद्य पदार्थ को शामिल करें.

विजयश्री प्रसाद, डायटिशियन

महिलाएं जरूर रखें ख्याल

महिलाओं में पोषण की कमी न हो इसके लिए विटामिन डी युक्त खान-पान, आयोडीन, प्रोटीन, फाइबर युक्त भोजन का सेवन कराना होगा. महिलाओं में पोषण की कमी से थायरॉयड हार्मोन का स्तर कम हो जाता है़ इससे गर्भधारण के बाद होनेवाले बच्चे अक्सर मंदबुद्धि पैदा होते हैं. खाने में प्रोटीन की सही मात्रा मिलने से महिलाओं के शरीर की कोशिश के निर्माण और विकास में मदद मिलती है. वर्तमान समय में मोटापा व अवसाद महिलाओं में तेजी से पोषण की कमी को बढ़ावा दे रही है. यह आगे चलकर महिलाओं में कैंसर, यूट्रस की समस्या व रक्तचाप को बढ़ावा देती है. फाइबर युक्त खाने से रक्त का संचार करने वाली धमनियों को लाभ मिलता है. शरीर में शुगर की मात्रा बनाये रखने के लिए महिलाओं को कंप्लेक्स शुगर की जरूरत पड़ती है, इसे फल और पोषण युक्त भोजन से पूरा किया जा सकता है.

- डॉ समरिना कमाल, सीनियर कंसल्टेंट स्त्री एवं प्रसूति रोग, आलम हॉस्पिटल

फिर भी राज्य की 65.2% महिलाओं में खून की कमी

झारखंड की महिलाएं सबसे ज्यादा खून की कमी से जूझ रही हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे - 4 के अनुसार झारखंड की 15 से 49 वर्ष की 65.2 फीसदी महिलाएं एनीमिया का शिकार है. इसमें शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण महिलाएं 67.3 फीसदी ज्यादा एनीमिया से जूझ रही है. इसका मुख्य कारण महिलाओं के खान-पान में पोषक तत्वों की कमी है. वहीं शहरी क्षेत्र की महिलाएं स्वास्थ्य परख खान-पान की जगह बाहर के खाने और जंक फूड की वजह से एनीमिक (खून की कमी) हो रही है. इसके अलावा महिलाओं में पोषण की कमी का बड़ा कारण 20-24 वर्ष की आयु में विवाहित होना है. 18 वर्ष की आयु सीमा से पूर्व शादी होने से महिलाओं के खान-पान में तेजी से बदलाव आता है. लगातार पोषक तत्वों की कमी से महिलाएं कमजोर बच्चों को जन्म देती है़ कई बार इसका असर इस कदर होता है कि बच्चे मंदबुद्धि पैदा होते हैं.

घर का खाना खिलायें और बच्चों को कुपोषण से बचायें

डॉ राजेश, शिशु रोग विशेषज्ञ

बच्चों में कुपोषण को लेकर कई तरह की बीमारियां हो रही हैं. अज्ञानता व अंधविश्वास के कारण इसे माता-पिता समझ नहीं पाते हैं और जब बच्चा गंभीर हो जाता है तो वह डॉक्टर के पास आते हैं. कुपोषण का मतलब सिर्फ वजन कम होना नहीं है. कई बच्चों में कुपोषण के कारण मोटापा भी होता है. कुपोषित बच्चे गरीब, मध्यमवर्गीय व अमीर परिवार से भी होते हैं. इसका मुख्य कारण है अनुशासनहीनता, जानकारी का अभाव व परंपराओं से अलग कार्य करना. गरीब के पास पौष्टिक आहार नहीं होता.

वह अपने बच्चों को माड़-भात खिलाते हैं. मध्यवर्गीय व अमीर घर के बच्चों के अभिभावक डब्बा बंद खाद्य पदार्थ, बच्चे के नहीं खाने पर छोड़ देना, मां का दूध नहीं पिलाने आदि से कुपोषित होते हैं. मां बच्चे को कम से कम छह माह तक अपना दूध पिलायें. दो वर्ष तक या बच्चे के खाने के बाद भी इसे जारी रखें. आजकल बच्चों की डिमांड के अनुसार माता-पिता भोजन देते हैं, जो कुपोषण के प्रमुख कारण हैं. कई बच्चे कुछ पौष्टिक खाने से मना करते हैं, तो अभिभावक उसे नहीं देते हैं, जो गलत है. आजकल बच्चे चाउमिन, बर्गर, शीतलपेय, चिप्स, कुरकुरे आदि खाते हैं, जो स्वास्थ के लिए हानिकारक है. इससे बच्चों में कई तरह के विटामिन की कमी हो जाती है और बच्चों में बुखार, त्वचा से संबंधित बीमारी, खाना नहीं पचना, बाल झड़ना आदि समस्या आती है. अभिभावक नहीं समझ पाते हैं कि यह कुपोषण के लक्षण हैं. बच्चों को घर का खाना के अलावा सत्तू, घी, फल, दूध देना जरूरी है.

Posted By : Sumit Kumar Verma

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