मूक-बधिर बच्चों के लिए मुफ्त कोक्लियर इम्प्लांट की सुविधा शुरू, 4 साल से कम उम्र में करा सकते हैं ऑपरेशन

डॉ अभिनीत ने बताया कोक्लियर इम्लांट में बच्चों के कान में एक विशेष मशीन लगाई जाती है, जिससे उनके सुनने की क्षमता विकसित होती है. कोक्लियर इम्लांट से जुड़ी सर्जरी काफी संवेदनशील होती है. यह सर्जरी काफी महंगी भी होती है, लेकिन इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों को अब पैसौं की चिंता करने की जरूरत नहीं है.

धनबाद : सुनने और बोलने में असहाय झारखंड और बिहार के बच्चों के लिए मुफ्त कोक्लियर इम्प्लांट की सुविधा शुरू हो गई है. पटना में एक बच्चे के सफल ऑपरेशन के साथ इसकी शुरुआत हुई. ईएनटी विशेषज्ञ डॉ अभिनीत लाल ने यह सफल ऑपरेशन किया. डॉ अभिनीत ने बताया कि हंस फाउंडेशन के सहयोग से बिहार-झारखंड में कोक्लियर इम्प्लांट की सुविधा मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही है.

उन्होंने कहा कि इसके तहत चार साल से कम उम्र के वैसे बच्चे जो सुन नहीं सकते या इसके कारण बोल नहीं पाते, उनका कोक्लियर इम्प्लांट नि:शुल्क किया जाता है. फिलहाल, पटना के पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल में यह सुविधा उपलब्ध है.

उन्होंने बताया कि कोक्लियर इम्लांट में बच्चों के कान में एक विशेष मशीन लगाई जाती है, जिससे उनके सुनने की क्षमता विकसित होती है. कोक्लियर इम्लांट से जुड़ी सर्जरी काफी संवेदनशील होती है. यह सर्जरी काफी महंगी भी होती है, लेकिन इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों को अब पैसौं की चिंता करने की जरूरत नहीं है. एक अभियान के तहत मुफ्त इलाज के जरिए इस बीमारी के उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है.

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डॉ अभिनीत बताया कि ‘बेरा टेस्ट’ के जरिए इस बीमारी का पता चल जाता है. हम मरीजों के परिजनों को सलाह देते हैं कि बीमारी का पता चलने के बाद जितनी जल्दी हो सके, उनका इलाज शुरू करा दें. अमूमन देखा जाता है कि एक से चार साल तक के बच्चों का ब्रेन ज्यादा तेजी से विकसित होता है. ऐसे में इलाज इसी उम्र के बीच में हो तो ज्यादा फायदेमंद होता है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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