फाल्गुन अमावस्या पर पितरों को कैसे करें प्रसन्न, जानें उपाय

Falgun Amavasya 2025: फाल्गुन अमावस्या 2025 पर पितरों की कृपा पाने के लिए तर्पण, पिंडदान और विशेष पूजा का महत्व है. जानें पितरों को प्रसन्न करने के आसान उपाय और शुभ कार्य.

Falgun Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का बहुत विशेष महत्व माना गया है. पंचांग के अनुसार, इस वर्ष फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी 2026 को पड़ रही है. यह दिन विशेष रूप से पितरों को समर्पित होता है. इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.

पितरों के लिए क्यों खास है अमावस्या?

मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा धरती के करीब आती है. इस दिन पितरों के नाम से पिंडदान और तर्पण करने से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. पितर प्रसन्न होते हैं तो घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है. साथ ही, अमावस्या का दिन पितृदोष और कालसर्प दोष से राहत पाने के लिए भी बहुत उत्तम माना जाता है.

फाल्गुन अमावस्या पर जरूर करें ये काम

  • फाल्गुन अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए.
  • अगर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान संभव न हो, तो घर के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं.
  • इसके बाद पीपल के पेड़ की पूजा करें.
  • पीपल के वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और उसके नीचे सरसों के तेल में काले तिल डालकर दीपक जलाएं. इससे पितृ दोष शांत होता है.

पितरों को प्रसन्न करने के आसान उपाय

  • पितरों का आशीर्वाद परिवार के लिए बहुत जरूरी होता है. इस अमावस्या के दिन
  • पीपल के पेड़ पर गंगाजल, काले तिल, शक्कर या चीनी, चावल और फूल अर्पित करें.
  • मन ही मन अपने पितरों का स्मरण करें और उनसे आशीर्वाद मांगें.
  • कहा जाता है कि अमावस्या का दिन शनि देव से भी जुड़ा होता है, इसलिए इस दिन शनि देव को नीले रंग का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है.

फाल्गुनी अमावस्या क्यों है विशेष?

शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन मास की अमावस्या का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. महाशिवरात्रि जैसे पावन दिन के बाद आने वाली अमावस्या और भी शुभ मानी जाती है. इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करना बहुत फलदायी माना गया है. विशेष रूप से प्रयागराज के संगम तट पर स्नान का बहुत महत्व है. मान्यता है कि फाल्गुन अमावस्या के दिन देवताओं का वास संगम तट पर होता है. यदि कुंभ का आयोजन हो, तो संगम स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है.