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Undekhi 2 review: खामियों के बावजूद एंटरटेन करने में कामयाब

2020 में ओटीटी प्लेटफार्म सोनी लिव पर रिलीज हुई क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज अनदेखी दर्शकों को प्रभावित करने में कामयाब रही थी.

By उर्मिला कोरी
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Undekhi 2 review
Undekhi 2 review
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वेब सीरीज - अनदेखी 2

निर्माता-अप्पलॉज एंटरटेनमेंट

निर्देशक आशीष आर शुक्ल

कलाकार- सूर्या शर्मा, हर्ष छाया, दिब्येन्दू, आँचल सिंह,अपेक्षा पोरवाल,नंदिश संधू, मियांग चांग और अन्य

रेटिंग ढाई

2020 में ओटीटी प्लेटफार्म सोनी लिव पर रिलीज हुई क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज अनदेखी दर्शकों को प्रभावित करने में कामयाब रही थी. जिस वजह से इस सीरीज के दूसरे सीजन का दर्शकों को बेसब्री से इंतज़ार था. सीरीज का दूसरा सीजन दस्तक दे चुका है.पिछला सीजन अपने नाम की तरह कई मायने में अनदेखा था लेकिन इस बार उस जादू को दुहराया नहीं जा सका है लेकिन हां यह सीजन भी एंगेजिंग और एंटरटेनिंग ज़रूर है साथ में किरदारों की दमदार परफॉर्मेंस भी है.

पिछले सीजन कहानी जहां खत्म हुई थी.इस सीजन वही से शुरू हुई है. कोयल(अपेक्षा) की जान के पीछे रिंकू पाजी( सूर्या) है तो डीएसपी (दिब्येन्दू) किसी भी कीमत पर उसे बचाकर सुंदरबन ले जाना चाहता है. उम्मीद थी कि कोयल के बदले की कहानी यह सीजन होने वाला है लेकिन दूसरे एपिसोड में कहानी का अहम प्लाट ड्रग्स का कारोबार बन जाता है शायद लेखन टीम के पास तीसरे सीजन के लिए प्लाट रखने का दबाव रहा होगा.

खास बात है कि इस बार कोयल ही नहीं बल्कि अटवालस की पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती उनकी अपनी बहू तेजी (आँचल सिंह) भी देती दिख रही है. क्या कोयल पापाजी और रिंकू को उसके अंजाम तक पहुंचा पाएगी या इस बार भी पावर और पैसा ही जीतेगा.तेजी कैसे अटवालस को चुनौती देगी. इसके लिए आपको सीरीज देखनी होगी

शो का अंत रीयलिस्टिक अंदाज़ में होता है. अच्छाई पर बुराई की जीत ये सब कहावतों में यह शो नहीं पहुंचता है.जो हकीकत में होता है और हो सकता है.यह शो उसी को दिखाता है.सीरीज में एक संवाद भी है इसकी जिंदा रहने पर कोई औकात नहीं थी मर कर क्या होगी.यही रियलिस्टिक अप्रोच इस शो की खास भी बनाती है.

खामियों की बात करें तो रीयलिस्टिक अप्रोच वाली इस वेब सीरीज में जमकर सिनेमेटिक लिबर्टी ली गयी है.कोई भी कहीं भी कभी भी आसानी से आ जा सकता है.कोई सिक्योरिटी नहीं है. अजर सेफहाउस ऐसी ही एक जगह है.जहां पर अरबों का ड्रग है.उसी जगह की वजह से अटवाल परिवार की हुकूमत चलती है लेकिन वहां कोई भी आसानी से आ जा सकता है. तेज़ी, कोयल,ऋषि का दोस्त,अभय आसानी से वहां आते जाते और कहानी में ट्विस्ट जोड़ते पूरी सीरीज में दिखें है.इसके अलावा गोलियों की बारिश में भी रिंकू,लकी,पापाजी,मुस्कान इनके किरदारों को कुछ नहीं होना है और दूसरे कैरेक्टर्स के लिए एक गोली भी काफी है. इस सिनेमेटिक लिबर्टी के अलावा स्क्रीनप्ले पिछले सीजन के मुकाबले कमतर रह गया हैं.पिछले सीजन में हर एपिसोड के साथ जबरदस्त ट्विस्ट जुड़ा हुआ रहता था .जो चौंकाता था.इस बार उसकी कमी रह गयी है.

कहानी में दिब्येन्दू के किरदार को जिस तरह से दरकिनार किया गया है ,वह भी अखरता है क्योंकि इस सीजन उनसे उम्मीदें ज़्यादा थी. कहानी में ड्रग के कारोबार में पंजाब चाहिए इस बात को कई बार दोहराया गया है.

अभिनय की बात करें तो पिछले सीजन की तरह इस सीजन भी सूर्या शर्मा और हर्ष छाया अपने दमदार अभिनय से छाए हुए हैं. आँचल सिंह अपने किरदार को बखूबी निभा गयी हैं अपेक्षा पोरवाल भी अपेक्षाओं पर खरी उतरी हैं. दिब्येन्दू सीमित स्क्रीन स्पेस में भी अपनी छाप छोड़ते हैं.इस सीजन मियांग चांग और नंदिश संधू की एंट्री सीरीज में हुई है. उनके किरदार को ज़्यादा में ज़्यादा स्कोप नहीं था हालांकि उन्होंने अपने किरदारों के साथ बखूबी न्याय किया है.बाकी के किरदार भी अपनी भूमिकाओं में जमें हैं खासकरशिवांगी सिंह और वरुण भट्ट ध्यान खींचते हैं.

दूसरे पहलुओं की बात करें सिनेमेटोग्राफी पिछले सीजन की तरह ही उम्दा है.हिमाचल की वादियों को कहानी में बखूबी जोड़ा गया है. संवाद में इस बार भी जमकर गालियों का इस्तेमाल किरदारों ने अपनी भड़ास,खुशी,गुस्सा अलग अलग भावनाओं को जाहिर करने में किया है. कहानी के अनुरूप बैकग्राउंड म्यूजिक है.

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