O Romeo Review:इस वायलेंट लव स्टोरी की चमक हैं इसके सितारें

शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की फिल्म ओ रोमियो देखने की प्लानिंग है तो इससे पहले पढ़ लें यह रिव्यु

फ़िल्म – ओ रोमियो

 निर्माता – साजिद नाडियाडवाला 

निर्देशक- विशाल भारद्वाज 

कलाकार – शाहिद कपूर ,तृप्ति डिमरी ,नाना पाटेकर,अविनाश तिवारी,दिशा पाटनी,तमन्ना भाटिया,विक्रांत मैसी,हुसैन दलाल  और अन्य 

प्लेटफार्म- सिनेमाघर 

रेटिंग – तीन 

o romeo review :आज सिनेमाघरों में ओ रोमियो ने दस्तक दे दी है. इस फिल्म से निर्देशक विशाल भारद्वाज और अभिनेता शाहिद कपूर की पॉपुलर जोड़ी वापस आ गयी है. इस वायलेंट लव स्टोरी में यह जोड़ी हैदर या कमीने वाला जादू भले ही दोहरा ना पायी हो लेकिन मामला रंगून जैसा भी नहीं हुआ है. यह वायलेंट लव स्टोरी लेखन की खामियों के बावजूद ट्रीटमेंट और कलाकारों के जानदार परफॉरमेंस की वजह से देखी जा सकती है।  

ये है फ़िल्म की कहानी 

हुसैन जैदी की किताब क्वींस ऑफ  माफिया पर आधारित यह फिल्म एक वक़्त के कुख्यात गैंगस्टर उस्मान उस्तरा और सपना दीदी की जिंदगी से मिलती जुलती है. फिल्मी रूपांतरण की बात करें तो ओ रोमियो गैंगस्टर उस्तरा  (शाहिद कपूर ) की कहानी है. वह एक सुपारी किलर है. जो अपने उस्तरे से शरीर से आत्मा निकालने के लिए मशहूर है. अतीत में कुछ ऐसा कहानी में ट्विस्ट हुआ है कि अंडरवर्ल्ड डॉन जलाल ( अविनाश तिवारी) के भाई का मर्डर कर वह जलाल का दुश्मन बन गया है . जलाल से बचने के लिए वह आईबी कॉप ख़ान सर ( नाना पाटेकर) की मदद करता है ताकि  पैसे और पुलिस का सरंक्षण उसे मिलता रहे. खान जलाल के अंडरवर्ल्ड के खात्मे के लिए उस्तरा की धार की मदद ले रहा है .उस्तरा इन सब से बाहर निकलना चाहता है.देश छोड़कर जाना चाहता है ताकि ख़ान के इशारों पर नहीं बल्कि अपनी जिंदगी अपनी तरह से जी सके, लेकिन इसी बीच उसकी मुलाक़ात अफ्सा  (तृप्ति डिमरी) से होती है. वह जलाल के साथ उसके चार साथियों की सुपारी उस्तरा को देती है . शुरुआत में उस्तरा इससे इनकार करता है लेकिन जल्द ही अफ्सा से एक तरफा इश्क़ उसे सुपारी किलर से रोमियो बना देता है। ऐसा रोमियो जो प्यार में जान दे भी सकता है और किसी की भी जान ले भी सकता है. क्या वह अफ्सा का बदला पूरा कर पायेगा। ये रोमियो इश्क़ में तर जाएगा या मर जाएगा। यही आगे की कहानी है.

फ़िल्म की खूबियां  

फिल्म के निर्देशक विशाल भारद्वाज ने ओ रोमियो के ट्रेलर लांच के बाद से यह बात दोहराई कि यह फिल्म हुसैन जैदी की किताब से प्रेरित है और उसमें ढेर सारा फिक्शन जोड़ा गया है.यह फिल्म को देखते हुए समझ आता है.यह गैंगस्टर ड्रामा है इसलिए फिल्म में जमकर खून खराबा और हिंसा है लेकिन फिल्म का इमोशन भी असरदार है और फिल्म में मुस्कुराहट भी जोड़ी गयी है खाकर पहले भाग में बॉलीवुड के सभी पॉपुलर मसलों का अच्छे से इस्तेमाल हुआ है. फर्स्ट हाफ में जिस तरह से किरदारों को सेट किया गया है. वह फिल्म को पूरी तरह से बांधे रखता है. फिल्म के संवाद अच्छे बन पड़े हैं. सीटी मार वनलाइनर के साथ गहराई वाले भी संवाद है.90 के दशक की यह फ़िल्म है. इस टाइमलाइन को अखबार की खबरों के ज़रिए बखूबी फ़िल्म में जोड़ा गया है. फिल्म की सिनेमेटोग्राफी भी इसका साथ देती है.

गीत संगीत भी है ख़ास

विशाल भारद्वाज की फिल्मों का गीत संगीत भी एक अहम किरदार होता है आखिरकार विशाल के धुनों से गुलजार साहब के शब्द जो जुड़ते हैं. फिल्म में रोमांटिक सांग से लेकर पार्टी सांग हर मूड का गाना शामिल है.जो पैरों को थिरकने से लेकर दिल को सुकून भी देता है।  फिल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक का भी जिक्र जरुरी है। पुराने सुपरहिट गीतों को फिल्म में जोड़ने का नया ट्रेंड यहां भी इस्तेमाल हुआ है. बैकग्राउंड म्यूजिक में माधुरी दीक्षित के आइकॉनिक गीत धक धक जहां शाहिद कपूर के एक्शन दृश्य को धमाकेदार बना गया है वही धीरे धीरे से मेरी जिंदगी में आना जैसे गाने रोमियो के दिल का हाल बयां करते हैं .

यहां नहीं बनी बात 

खामियों की बात करें तो फ़िल्म की गति धीमी है खासकर सेकेंड हाफ. स्क्रीनप्ले उस्तरा के ट्रांसफॉर्मेशन को प्रभावी ढंग से सामने नहीं ला पायी है . हर दिन एक नई लड़की के साथ रात बिताने वाला उस्तरा अचानक से अफ्शा के साथ इंटेंस प्यार में कैसे पड़ जाता है कि जान लेने ही नहीं बल्कि जान देने को भी तैयार हो जाता है .सेकेंड हाफ पूरी तरह से प्रेडिक्टेबल रह गया है . फ़िल्म का क्लाइमेक्स मुंबई छोड़कर स्पेन में क्यों शूट किया यह भी थोड़ा अजीब लगता है. फिल्म में जब इतनी सिनेमैटिक लिबर्टी ली गयी थी तो जलाल के किरदार को मुंबई लाया जा सकता था. उस्तरा के किरदार का इतनी आसानी से जलाल के स्पेन के किंगडम में दाखिल हो जाना भी फिल्म के स्क्रीनप्ले को ज्यादा फ़िल्मी बना गया है. कमजोर पहलुओं में इसकी लम्बाई भी है.फिल्म की लम्बाई भी कम से कम बीस मिनट छोटी की जा सकती थी.फिल्म लगभग तीन घंटे की है.

अभिनय में नाम बड़े और उनके काम भी बड़े

अभिनय की बात करें तो फ़िल्म में अभिनय के एक से बढ़कर एक नाम है.शाहिद कपूर ने उस्तरा के किरदार में धारदार परफॉरमेंस दी है.उस्तरा के किरदार से जुड़े हर रंग को उन्होंने हर फ्रेम में बखूबी परिभाषित किया है.तृप्ति डिमरी ने अपने अभिनय से यह साबित कर दिया है कि यह किरदार उन्ही के लिए लिखा गया था. वह परदे पर ना सिर्फ खूबसूरत नजर आयी हैं बल्कि अफ्सा की भूमिका को इमोशन और अग्रेशन के साथ जिया है.अपनी सीमित भूमिका में अविनाश तिवारी याद रह जाते हैं . उन्हें पर्दे पर थोड़ा और स्क्रीन टाइम दिया जाना चाहिए .नाना पाटेकर ने अपने किरदार को बहुत ही दिलचस्प ढंग से पर्दे पर जिया है.परदे पर उनकी और शाहिद की केमिस्ट्री बहुत अच्छी बन पड़ी है. अरुणा ईरानी और फरीदा जलाल को एक अरसे पर पर्दे पर देखना सुकून देता है.हुसैन दलाल और सिंगर एक्टर राहुल देशपांडे सितारों की भीड़ में अपनी उपस्थिति दर्शाने में कामयाब हुए हैं. विक्रांत,दिशा और तमन्ना फिल्म में स्टार पावर जोड़ने के साथ- साथ अपनी मौजूदगी से कहानी में बहुत कुछ जोड़ गए हैं.


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लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.

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