फिल्म -धुरंधर द रिवेंज
निर्माता – जिओ सिनेमा
निर्देशक -आदित्य धर
कलाकार -रणवीर सिंह,अर्जुन रामपाल,संजय दत्त,सारा अर्जुन,राकेश बेदी,गौरव गेरा,यामी गौतम माधवन और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग -साढ़े तीन
dhurandhar 2 movie review :इस साल की मोस्ट अवेटेड फिल्म धुरंधर द रिवेंज ने सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है. यह इंटेंस एक्शन सीक्वल पिछली ब्लॉकबस्टर फिल्म के मुकाबले कितनी दमदार या कमतर है.अगर आप यह जानना चाहते हैं तो यह रिव्यु आपके लिए है.
ये है कहानी
धुरंधर 2 में हमजा (रणवीर सिंह )के अतीत की कहानी दिखाई जायेगी. यह पहले से ही तय था और फिल्म की शुरुआत भी इसी से होती है.पहले चैप्टर में हमजा उर्फ़ जसकीरत सिंह रांगी की कहानी को दिखाया जाता है. जसकीरत का परिवार पंजाब में खुशहाल जिंदगी जी रहा है. पिता फ़ौज में हैं. जसकीरत भी मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए चुन लिया गया लेकिन एक जमीन के टुकड़े के लिए उसके पिता की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है. बहनों के साथ गैंगरेप होता है.जिसके बाद जसकीरत बदला लेने के लिए किलिंग मशीन बन दोषी के पूरी नस्ल का खात्मा कर देता है.वह जेल पहुँच जाता है.इस किलिंग मशीन का इस्तेमाल किस तरह से आगे रॉ एजेंसी पाकिस्तान के लिए करती है. यह बताते हुए कहानी पाकिस्तान के ल्यारी में फिर पहुँच जाती है. जहाँ पहला पार्ट खत्म हुआ था.रहमान डकैत की मौत के बाद हमजा ल्यारी के ज़रिये कराची पर कब्जा जमाते हुए भारत में दहशतगर्दी फैलाने वाले लोगों को उनके अंजाम तक पहुंचाता है.यही हमजा का पाकिस्तान से भारत के लिए लिया बदला है. इस दौरान जमील जमाल(राकेश बेदी ), एसपी चौधरी(संजय दत्त ), उजैर बलोच और मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल )क्या हमजा के मंसूबों से बेखबर रहते हैं या हमजा को सबकी खबर है. इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको सिनेमाघर की तरफ रुख करना होगा.
फिल्म की खूबियां
पिछले पार्ट की तरह इस पार्ट में भी कहानी अलग -अलग चैप्टर के जरिये ही कही गयी है.जसकीरत के पहले ही चैप्टर से फिल्म का मूड सेट कर दिया जाता है.उसके बाद कहानी आगे बढ़ती है.पंजाब में ड्रग की समस्या,नकली नोट के लिए यूपी और नेपाल के रास्ते इन सभी को पाकिस्तान से जोड़ा गया है. जो फिल्म के स्क्रीनप्ले को मजबूती देता है, सिर्फ यही नहीं फिल्म में रियल घटनाओं को इस बार भी जमकर जोड़ा गया है. नोटबंदी का फैसला हो या पूर्व नेता अतीक अहमद का पत्रकारों के बीच जानलेवा हमला. इन सभी को फिल्म में जोड़ा गया है.जो फिल्म के नरेटिव को मजबूती देता है हालांकि कुछ सवाल भी खड़े करती है.इसके साथ ही फिल्म जमकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महिमा मंडन करना नहीं भूलती है. इसके बावजूद प्रोपगेंडा नहीं पूरी तरह से मनोरंजक फिल्म है.फिल्म का इंटरवल दिलचस्प है तो क्लाइमेक्स जोरदार है. फिल्म का इमोशनल कोर पिछली फिल्म से ज्यादा मजबूत है.गौरव गेरा का आखिरी सीन हो या आखिर में दुविधा में फंसे जसकीरत का पूरा सीक्वेंस इमोशनल कर जाता है.फिल्म के संवाद फिल्म और किरदार के साथ बखूबी न्याय करते हैं.घर में घुसकर मारेंगे. घायल हो इसलिए घातक हो यह संवाद पहले ही सीटियां और तालियां बटोर चुके हैं. इस पार्ट में भी उनका इस्तेमाल हुआ है. फिल्म का एक्शन रोंगटे खड़े करने वाला है. सपोर्टिंग एक्टर्स के चुनाव और उनके लुक की भी तारीफ बनती है.हर किरदार असल जिंदगी के हमशक्ल की तरह नज़र आता है. फिल्म के फर्स्ट हाफ आने के बाद फिल्म से जुड़े जितने भी सवाल थे. यह फिल्म उनका बखूबी जवाब दे जाती है.
खामियां भी गयी हैं रह
खामियों की बात करें तो फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो रह गया है. उस तरह से ट्विस्ट एंड टर्न कहानी से नहीं जुड़ पाए हैं. जो मामला एकदम यादगार बना पाए. हां सेकेंड हाफ में फिल्म माहौल एकदम सेट करते हुए उम्मीदों पर खरी उतरती है.लगभग 3 घंटे 50 मिनट की यह फिल्म लम्बी हो गयी है खासकर फर्स्ट हाफ में थोड़ी कांट छांट हो सकती थी. फिल्म में बड़े साहब उर्फ़ दाऊद इब्राहिम को लेकर जिस तरह के दावे और बातें हुई थी.वह भी खोखली निकली. पुराने गानों का इस पार्ट में भी जमकर इस्तेमाल हुआ है लेकिन गीत संगीत इस बार वह प्रभाव नहीं बना पाया है. जो पहले पार्ट ने बनाया था. कहीं कहीं मामला मिसमैच हो गया है. डायलॉग के बीच में अचानक से गाना शुरू तो कभी बंद हो गया है. पहले पार्ट में स्वैग भर भर कर था लेकिन इस पार्ट में वह मिसिंग था. इस बार गाली और हिंसा पिछले पार्ट के मुकाबले बहुत ज्यादा है.
रणवीर सिंह का अभिनय इस बार फिल्म की जान
पिछले पार्ट में अभिनय के मामले में अक्षय खन्ना ने सबसे ज्यादा तारीफें बटोरी थी, लेकिन रणवीर सिंह धुरंधर 2 की जान है. फिल्म में उन्होंने दो किरदारों को जिया है और परदे पर दोनों किरदारों को अलग -अलग तरह से जिया है.जो इस बात को पुख्ता कर जाता है कि रणवीर सिंह शानदार हैं.दोनों किरदारों पर उनकी मेहनत दिखती है.राकेश बेदी ने अपने अभिनय से किरदार में छाप छोड़ी है.फिल्म के आखिर में उनका किरदार एक अलग ही लेवल पर पहुँच जाता है, जिससे आप सीटियां और तालियां बजाने को मजबूर हो जाते हैं. संजय दत्त ने एसपी चौधरी के किरदार को अपने अंदाज से एक बार फिर ख़ास बनाया है.अर्जुन रामपाल औसत रहे हैं.सारा अर्जुन के हिस्से इस बार सीन कम आये हैं ,लेकिन वहपरदे पर बेहद खूबसूरत नज़र आयी हैं. गौरव गेरा, आर माधवन सहित बाकी के किरदारों ने भी अपनी मौजूदगी से रंग जमाया है.
