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Exclusive : बरेली की बर्फी फेम एक्टर रोहित चौधरी बोले- कभी नहीं लगा कि आउटसाइडर हूं इसलिए मेरा संघर्ष ज़्यादा है

By उर्मिला कोरी
Updated Date
Rohit Chaudhary
Rohit Chaudhary
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'Bareilly Ki Barfi' actor Rohit Chaudhary : फ़िल्म बरेली की बर्फी से सुर्खियों में आए अभिनेता रोहित चौधरी का नाम फ़िल्म जबरिया जोड़ी,बहुत हुआ सम्मान और वेब सीरीज फॉरगॉटन आर्मी, कनपुरिए, लव जे एक्शन से लगातार चर्चा में बना रहा है. रोहित ने हाल ही अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ फ़िल्म जोगीरा सारा रा रा की शूटिंग खत्म की है. नवाज़ुद्दीन की तरह रोहित भी नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से हैं. बातचीत के प्रमुख अंश...

जोगीरा सारा रा रा दर्शकों के लिए क्या खास है?

जोगीरा सारा रा रा में फ़िल्म बाबूमोशाय बन्दूकबाज़ की ही टीम है. निर्देशक कुशाल नंदी हैं लेखक ग़ालिब असद भोपाली हैं और अभिनेता नवाज़ हैं ही. वो डार्क क्राइम फ़िल्म थी. ये पूरी तरह से फैमिली एंटरटेनर फ़िल्म है. नवाज़ भाई इस फ़िल्म में जबरदस्त कॉमेडी करते नज़र आएंगे।पूरा परिवार साथ में इस फ़िल्म को एन्जॉय कर सकेगा. फ़िल्म की लखनऊ और बनारस शेड्यूल पूरा हो गया है. कुछ पोर्शन बचें हैं, जिनकी शूटिंग मुंबई में कुछ समय के अंतराल के बाद होगी.

सेट पर नवाज़ के साथ कैसे बॉन्डिंग थी?

शूटिंग के दो दिन बाद उन्हें पता चला कि मैं भी एनएसडी से हूं तो फिर कहानियों का सिलसिला शुरू हो गया कि उनके ज़माने में कौन पढ़ाने आता था. उन्होंने कौन कौन से प्ले किए हैं. नवाज़ भाई बहुत ही सिंपल और जमीन से जुड़े इंसान आज भी हैं. ये देखकर अच्छा लगता है.

फिल्मों के सेट पर आए दिन कोरोना संक्रमण की खबरें आती रहती है ऐसे में कितना मुश्किल रहा आउटडोर शूटिंग?

एक्टर के तौर पर नहीं इंसान के तौर पर आप परेशान हो जाते हैं. आपको लगता है कि अभी तो सबकुछ ठीक हो रहा था फिर ये सब शुरू हो गया है.आम आदमी इसमें सबसे ज़्यादा प्रभावित है. खासकर जो रोज कमाते और खाते है. हमारी तो सेविंग हैं. वैसे सेट पर हमने पूरी तरह से एहतियाद बरता था.

टीवी से फिल्मों और वेब सीरीज की इस जर्नी को कैसे देखते हैं?

सच कहूं तो मैंने टीवी कभी नहीं किया है . एक मेरे नाम के टीवी अभिनेता भी हैं तो लोगों को अक्सर इस बात का कंयूजन हो जाता है. कई बार मैसेज आते हैं कि सर आपने उस सीरियल में अच्छा काम किया है. पद्मावत के लिए मैसेज आए थे मैंने लिखा भाई मैं हूँ ही नहीं.

टीवी ना करने की कोई खास वजह?

सच कहूं तो मैं खुद टीवी नहीं देखता हूं. मुझे टीवी देखने में मज़ा नहीं आता है तो मैं उसमें काम कैसे कर सकता हूं. मैं किसी को कमतर नहीं बता रहा लेकिन हां काम वो करना चाहिए जिसमें मज़ा आए. टीवी की जरूरतें अलग हैं. वहां कोई किरदार हिट हो गया तो उसको फिर भुनाने के लिए चलता ही जाएगा. एक एक्टर के तौर पर किरदार के लिए कुछ बचता ही नहीं है. बरेली की बर्फी के बाद मुझे 5 सीरियलों के ऑफर्स आए थे और सभी में एक ही रोल था हीरो का दोस्त.

जब आप इस इंडस्ट्री से नहीं है ऐसे में जब काम मिल रहा है लेकिन उसको ना कहना है क्योंकि वो आपकी पसंद का नहीं है क्या मुश्किलें रहती हैं?

बहुत सारी होती हैं. सभी को पता है कि मुम्बई बहुत महंगा शहर है. ऐसे में खर्चों को मैनेज करना मुश्किल होता है. मुझे लगता है कि आपको इंडस्ट्री में बनें रहना है तो आपके दिमाग का हेल्थी होना बहुत ज़रूरी है. इसलिए जब मैं खाली था तो मैंने खुद को थिएटर करने में बिजी रखा. मैंने 10 प्ले डायरेक्ट किए हैं. थिएटर मुझे सुकून देता है क्योंकि मैं थिएटर से ही आया हूं.

एक्टिंग का ख्याल कैसे आया और अभिनय में आपकी ट्रेनिंग क्या रही है?

मैं इटावा से हूं. 12 वीं पढ़ाई के बाद लखनऊ आगे की पढ़ाई के लिए आ गया था. मैंने सोचा रोहित बल जैसा फैशन डिजाइनर बन जाता हूं. छह महीने उसकी तैयारी की. एग्जाम भी दिया और फेल हो गया तो छह महीने बर्बाद गए. उसके बाद मैंने एनआईआईटी से सर्टिफिकेट इन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की लेकिन उससे भी बोर हो गया. मॉडलिंग करने का सोचा. मिस्टर लखनऊ में हिस्सा लिया सेकंड रनरअप हुआ. उससे भी खुश नहीं था फिर मैंने एक प्ले देखा. पहली बार मेरे जीवन में मैंने देखा था. मैंने तय कर लिया कि मुझे एक्टिंग कर लिया. फिर मैंने थिएटर जॉइन किया. मालूम पड़ा कि एनएसडी के लिए ग्रेजुएशन ज़रूरी है तो फिर से पढ़ाई शुरू की. यहीं से मैंने एनएसडी की तैयारी की फिर 2008 से 2011 मैंने एनएसडी की पढ़ाई की. 2011 से 2015 तक मैंने झुमरू और गंगूरा मैंने उसमें काम किया.

पहली फ़िल्म आपकी क्या थी?

मेरी पहली फ़िल्म लाइट बिरयानी कभी रिलीज ही नहीं हुई जिसमें मैं और पंकज त्रिपाठी लीड में थे. 2013 की ये बात है. अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इतने आ गए हैं शायद फ़िल्म रिलीज हो जाए बस लोगों को आउटडेटेड कहानी ना लगे.

आउटसाइडर और इनसाइडर की जो बहस है उसपर आपकी क्या राय है?

मुझे ऐसा कभी नहीं लगा कि मैं आउटसाइडर हूं तो ज़्यादा मेरा संघर्ष है. 2016 में मैं मुंबई शिफ्ट हुआ और मुझे फ़िल्म बरेली की बर्फी ऑडिशन से मिल भी गयी. मेरा ऑडिशन अच्छा था इसलिए मुझे फ़िल्म मिली. उसके बाद मैं जबरिया जोड़ी,बहुत हुआ सम्मान जैसी फिल्मों और वेब सीरीज कनपुरिए, फ़ॉरगोटेन आर्मी जैसी वेब सीरीज से जुड़ता चला गया.

क्या एक एक्टर के तौर पर आपको उस तरह के ऑफर्स मिलने लगे हैं जैसे आपकी चाहत है?

फिल्मों में तो अभी भी मैं हीरो के दोस्त वाली भूमिका के लिए सबसे ज़्यादा आफर ही आते हैं. सबको तो मना नहीं कर सकता हाँ उनमें देखता हूं कि क्या अलग मैं किरदार को दे सकता हूं. दिखना भी ज़रूरी है वरना यहां आज भी मामला आउट ऑफ साइट आउट ऑफ माइंड वाला ही है. हाँ डिजिटल में एक्सपेरिमेंट हो रहे हैं. सोनी लिव पर एक सीरीज आयी है लव जे एक्शन उसमें मैं विलेन बना हूं. उसमें मेरी टाइपकास्टिंग टूटी है. उसके लिए मैं सौरभ तिवारी का आभारी रहूंगा.

आपकी आनेवाले प्रोजेक्ट?

आदित्य रॉय कपूर के साथ फ़िल्म ओम फ़िल्म कर रहा हूं.

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