‘अरे ओ सांबा, कितने आदमी थे ?’ आज भी यह डायलॉग सुनते ही गब्बर सिंह यानी अमजद खान का चेहरा आंखों के सामने उभर आता है. उन्हें कला विरासत के रूप में मिली थी उनके पिता जयंत फिल्म इंडस्ट्री के खलनायक रह चुके थे. उन्होंने बतौर कलाकार अपने सिने करियर की शुरुआत फिल्म ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ से की थी. वर्ष 1973 में आई फिल्म ‘हिंदुस्तान की कसम’ में उन्होंने एक अभिनेता के तौर पर काम किया लेकिन इस फिल्म से उन्हें कोई खास पहचान नहीं मिली.
अमजद खान को एक थियेटर में परफॉर्म करते देख पटकथा लेखक सलीम खान ने अपनी फिल्म ‘शोले’ में गब्बर के लिए उनके सामने प्रस्ताव रखा जिसे अमजद खान ने स्वीकार कर लिया. ‘शोले’ में अपने किरदार गब्बर को लेकर अमजद खान ने खूब वाहवाही लूटी. इस किरदार ने उन्हें खलनायकी का बेताज बादशाह बना दिया.
अमजद खान ने कई यादगार फिल्मों में काम किया. अमिताभ बच्चन के साथ उनकी कैमेस्ट्री और दोस्ती को खूब सराहा गया. अमजद खान के पास सबकुछ था- रुपया-पैसा, शोहरत, मोहब्बत और बच्चे. उनकी अदाकारी को फिल्मों में भी खूब पसंद किया जा रहा था और वे अपने करियर में तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे थे.
लेकिन उनकी जिंदगी में एक ऐसी घटना घटी जिसने सबकुछ तहस-नहस कर दिया. बात 1976 की है. वे फिल्म ‘द ग्रेट गैम्बलर’ की शूटिंग के लिए लोकेशन पर जा रहे थे. फिल्म में अमिताभ बच्चन भी थे और दोनों को अपने-अपने समय के अनुसार सेट पर पहुंचना था. लेकिन अमजद खान जैसे ही मुंबई-गोवा हाईवे पर पहुंचे उनका भयानक एक्सीडेंट हो गया.
इस एक्सीडेंट में उनकी कई पसलियां टूट गईं और उनके एक फेफड़े में छेद हो गया. गंभीर चोटों की वजह से वे लगभग कोमा में पहुंच गये थे लेकिन वे ठीक हो गये. एक्सीडेंट के दौरान उनकी पत्नी शीला को गंभीर चोटें आईं. वे 6 महीने की प्रेग्नेंट थी लेकिन इलाज के दौरान पता चला कि गर्भ में शिशु सुरक्षित है.
अमजद खान को इलाज के दौरान उन्हें जो दवाईयां दी गई उसकी वजह से उनका वजन बढ़ता ही चला गया. जिस वजह से उन्हें कई और परेशानियां ने घेर लिया. वे इस वजह से परेशान रहने लगे थे. उनकी सेहद दिनोंदिन बिगड़ती जा रही थी और वे अंदर से टूटने लगे थे. साल 1992 में उनका हार्ट फेल हो गया और उनका निधन हो गया. उस समय अमजद खान की उम्र 51 साल थी. उनकी कई फिल्में उनके मौत के बाद रिलीज हुई थी.
