फ्लैश बैक : आज भी जीवंत लगता है दीवाली पर ''नजराना'' का गीत

1961 में आयी फिल्म ‘नजराना’ के दीवाली गीत- ‘मेले हैं चरागों के रंगीन दीवाली है…’ को लता मंगेशकर ने गाया है. यह ब्लैक एंड व्हाइट दौर का हिट दीवाली गीत था, जिसे राजकपूर और वैजयंती माला पर फिल्माया गया. यह गीत आज भी देखने पर बेहद जीवंत लगता है. यह वही फिल्म है, जिससे राज […]

1961 में आयी फिल्म ‘नजराना’ के दीवाली गीत- ‘मेले हैं चरागों के रंगीन दीवाली है…’ को लता मंगेशकर ने गाया है. यह ब्लैक एंड व्हाइट दौर का हिट दीवाली गीत था, जिसे राजकपूर और वैजयंती माला पर फिल्माया गया. यह गीत आज भी देखने पर बेहद जीवंत लगता है.
यह वही फिल्म है, जिससे राज कपूर के मन में वैजयंती माला के प्रति आकर्षण पैदा हुआ. तमिल फिल्मों के मशहूर निर्देशक सीवी श्रीधर ने तमिल सुपरहिट फिल्म ‘कल्याणा परिसू’ पर ‘नजराना’ बनाने की योजना बनायी. इसमें हीरो तो राज कपूर को लिया, मगर हीरोइन सरोजा देवी को ही ले लिया, जो तमिल फिल्म में थीं. मगर शूटिंग शुरू होते किसी बात पर सरोजा देवी और श्रीधर में मतभेद हो गये और सरोजा फिल्म से बाहर हो गयीं. तब श्रीधर ने वैजयंती माला को ले लिया. ‘नजराना’ में वैजयंती के आने से राज कपूर को जैसे मुंहमांगी मुराद मिल गयी और दोनों कलाकारों की जोड़ी बनी.

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