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मायावती को हुआ एहसास, 6000 करोड़ खर्च कर स्मारक बनवाना गलत था, बोलीं-अब करूंगी यूपी का विकास

बीएसपी सुप्रीमो मायावती को अपनी पिछली सरकार की गलतियों का अहसास हो गया है. मायावती का कहना है कि अगर यूपी में दोबारा उनकी सरकार बनती है तो इस बार वह स्मारक और पार्क नहीं, प्रदेश को बदलने का काम करेंगी.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
बसपा प्रमुख मायावती
बसपा प्रमुख मायावती
File

UP Assembly Elections 2022: बहुजन समाज पार्टी (Bhaujan Samaj Party) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने कहा है कि अगर इस बार उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में उनकी पार्टी की सरकार आयी तो वे अब स्मारक और पार्क नहीं, प्रदेश को बदलने का काम करेंगी. उन्होंने कहा कि बीएसपी (BSP) समता मूलक समाज के लिए काम करती है. यह सर्वसमाज की पार्टी है. हमें महापुरुषों के लिए काम करना था, इसलिए स्मारक (Smarak) और पार्क (Park) बनवाए. मायावती ने ये बातें प्रदेश भर में चल रहे बसपा के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन के प्रथम चरण के समापन मौके पर पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए कहीं.

ब्राह्मण शंख बजायेगा, हाथी बढ़ता जाएगा

बसपा के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में 'हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश हैं' और 'ब्राह्मण शंख बजायेगा, हाथी बढ़ता जाएगा' इस प्रकार के नारे भी लगाए गए. मायावती की उपस्थिति में शंखनाद, मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन से कार्यक्रम शुरू हुआ. इस दौरान सतीश चंद्र मिश्रा की पत्नी कल्पना मिश्रा ने मायावती को त्रिशूल और शंख देकर उनका स्वागत किया. जबकि सतीश चंद्र मिश्रा ने गणेश जी की प्रतिमा भेंट की.

9 अक्टूबर को होगा बड़ा सम्मेलन

मायावती ने कहा कि 9 अक्टूबर को कांशीराम जयंती हैं. इस मौके कांशीराम स्मारक स्थल पर बड़ा सम्मेलन होगा. उन्होंने कहा कि बीजेपी वाले चाहे जितनी भाभियों को लेकर घूम लें, लेकिन अब महिलाएं इनको वोट नहीं देंगी. मायावती सेक्टर प्रभारियों और जिलाध्यक्षों के साथ कल बैठक करेंगी.

मायावती पर जनता के करोड़ों रुपये फूंकने का आरोप

दरअसल, मायावती ने मुख्यमंत्री रहते हुए लखनऊ और नोएडा में कई स्मारक, हाथी की मूर्तियां और पार्क बनवाए. आरोप है कि इस दौरान उन्होंने जनता के करोड़ों रुपये फूंक दिए. मायावती को इसके चलते काफी आलोचना झेलना पड़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में इससे जुड़े एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा था कि मायावती के शासनकाल में पार्कों और मूर्तियों में जो पैसा खर्च हुआ है, उसे सरकारी खजाने में लौटा देना चाहिए.

सपा की अखिलेश सरकार में हुई थी जांच

जब 2012 में सपा की सरकार आयी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनें तो उन्होंने मायावती के शासनकाल के दौरान बने स्मारक और पार्कों में घोटाला होने का संदेह होने पर जांच करायी थी. जब एलडीए ने इसकी जांच की तो पता चला कि लखनऊ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बनाए गए पार्कों और स्मारकों पर कुल 5,919 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. जांच में यह भी पता चला कि इन पार्कों और मूर्तियों के रखरखाव के लिए 5,634 कर्मचारी लगाए गए थे.

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका के मुताबिक, मायावती ने अपने शासनकाल में लखनऊ में 7 और गौतमबुद्ध नगर में 3 पार्क बनवाए थे, जिसके लिए करीब 750 एकड़ जमीन उपयोग में लायी गई थी. इसके अलावा पता चला कि मायावती की मूर्तियों पर 3.49 करोड़, कांशीराम की मूर्तियों पर 3.37 करोड़ और 60 हाथियों पर 52.02 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.

हर साल खर्च हो रहे 180 करोड़ रुपये

मायावती के शासनकाल में बनवाए गए पांच स्मारकों और हाथियों की सुरक्षा व रखरखाव पर हर साल 180 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. स्मारकों के रखरखाव और सुरक्षा के लिए 5,788 कर्मचारियों की तैनाती की गई है. याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि संस्कृति विभाग का 90 फीसदी बजट मूर्तियों की स्थापना में खर्च हुआ. स्मारकों में लगी हाथी की मूर्तियां बीएसपी के लिए मुसीबत ही बनी हैं. कभी हाथियों की सूंड ऊपर करनी पड़ी तो कभी उन्हें ढका गया. इस पर भी काफी राशि इस्तेमाल की गई.

इन पार्कों-स्मारकों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये

बता दें, लखनऊ में आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन प्रतीक स्थल 125 करोड़ क्षेत्रफल पर फैला है, जिसकी कुल लागत 1363 करोड़ रुपये है. वहीं कांशीराम मेमोरियल 70 एकड़ में फैला हुआ है, जिसे बनाने में 730 करोड़ रुपये खर्च किए गए. जबकि रमाबाई रैली स्थल, जो 51 एकड़ में फैला हुआ है, उसे बनाने में 655 करोड़ रुपये खर्च किए गए. इसके अलावा, 10.8 हेक्टेयर में फैले बुद्ध शांति उपवन को बनाने में 460 करोड़, 72 एकड़ में फैले कांशीराम इको पार्क को बनाने में 1000 करोड़, 30 एकड़ में फैले गोमती विहार पार्क को बनाने के लिए 300 करोड़ और 20 एकड़ में फैले गोमती पार्क को बनाने के लिए 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

इसके अलावा, नोएडा में 80 एकड़ में फैले राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल ऐंड ग्रीन गार्डन को बनाने में 685 करोड़ रुपये, बादलपुर, ग्रेटर नोेएडा में 10 हेक्टेयर में फैले आंबेडकर पार्क को बनाने में 96 करोड़ रुपये और 4 हेक्टेयर में फैले बुद्ध पार्क को बनाने के लिए 46 करोड़ रुपये खर्च किए गए. बता दें, लखनऊ में हाथी की 152 और नोएडा में 56 मूर्तियां लगाई गईं हैं. मूर्तियों की लागत 99.84 करोड़ रुपये है. एक मूर्ति की लागत 48 लाख रुपये रही.

Posted by : Achyut Kumar

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Published Date

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