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UP: लखीमपुर हिंसा के बाद तराई इलाकों में बदलेगी सियासी गणित? सिख वोटर निभाते हैं जीत-हार में अहम भूमिका

नेपाल से सटे यूपी पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, सीतापुर, शाहजहांपुर और रामपुर जिले को तराई बेल्ट की संज्ञा दी गई है. इन इलाकों में करीब 42 सीट है.

By Prabhat khabar Digital
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लखीमपुर हिंसा के बाद तराई इलाकों में बदलेगी सियासी गणित
लखीमपुर हिंसा के बाद तराई इलाकों में बदलेगी सियासी गणित
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद यूपी तराई इलाकों पर सबकी नजर टिक गई है. नेपाल से सटे इन तराई इलाकों में विधानसभा की करीब 42 सीट है, जिसमें बीजेपी ने पिछले चुनाव में 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी. तराई इलाके में यूपी के छह जिले आते हैं.

जानकारी के मुताबिक नेपाल से सटे यूपी पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, सीतापुर, शाहजहांपुर और रामपुर जिले को तराई बेल्ट की संज्ञा दी गई है. इन इलाकों में करीब 42 सीट है. 2012 के चुनाव में यहां पर बीजेपी को सिर्फ पांच सीटों पर जीत हासिल हुई थी. हालांकि 2017 के चुनाव में बीजेपी ने बड़ा उलटफेर करते हुए 37 सीटों पर जीत दर्ज की

'मिनी पंजाब' के नाम से जाना जाता है ये इलाका- नेपाल के सीमावर्ती इलाकों से सटे तराई इलाकों को यूपी का मिनी पंजाब भी कहते हैं. बता दें कि यहां पर अधिकतर आबादी सिख समुदाय की रहती है, जिससे इस इलाके को मिनी पंजाब कहा जाता है. ये सिख समुदाय आजादी के वक्त पलायन कर इन इलाकों में बस गएकरीब.

करीब 10 सीटों पर सिख समुदाय तय करते हैं जीत और हार का फैसला- बता दें कि तराई बेल्ट के करीब 10 से अधिक सीटों पर सिख समुदाय जीत और हार का फैसला तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है. 2014 के चुनाव में ये समुदाय बीजेपी के साथ मजबूती से जुड़ा, जिसका परिणाम यह हुआ कि 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में अधिकांश सीटों पर बीजेपी के कैंडिडेट को जीत मिली.

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