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UP Chunav 2022: यूपी के इस विधानसभा सीट की अजब है कहानी, आज तक नहीं मिला क्षेत्र का विधायक

साल 1957 में बिल्हौर विधानसभा में पहली बार मतदान हुआ था तब ब्रजरानी देवी को पसंद किया था इसी वर्ष कांग्रेस के मुरलीधर मतदान के बाद विधायक बने थे.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Kanpur
Updated Date
बिल्हौर विधानसभा
बिल्हौर विधानसभा
फोटो - प्रभात खबर

UP Chunav 2022: उत्तर प्रदेश की बिल्हौर(सु०) विधानसभा में आज तक कोई भी क्षेत्र का विधायक नही मिला है. दरअसल इस सीट पर 17 बार विधानसभा के चुनाव हो चुके है पहली बार इस ब्रजरानी देवी को मनोनयन के बाद यहां की जनता 16 विधायक चुन चुकी है. वही इस सीट पर 17 विधायक चुने गए जिसमे 16 विधायक क्षेत्र के नही रहे है. इस विधानसभा सीट का कई बार परिसीमन भी हुआ लेकिन आरक्षण की व्यवस्था वैसी की वैसी रही. वही बिल्हौर से सटे क्षेत्र रसूलाबाद और कन्नौज की सीट भी सुरक्षित है जबकि चौबेपुर विधानसभा का बिठूर में समा गई है.

1957 में पहली बार हुआ था मतदान

साल 1957 में बिल्हौर विधानसभा में पहली बार मतदान हुआ था तब ब्रजरानी देवी को पसंद किया था इसी वर्ष कांग्रेस के मुरलीधर मतदान के बाद विधायक बने थे. वही कानपुर के रहने वाले थे और 1962 में दोबारा से निर्वाचित हुए थे. 1967 से 1980 तक मोतीलाल देहलवी लगातार पांच बार विधायक चुने गए.1991,1993और 2002 में शिवकुमार बेरिया चुनाव जीते 1996 में भगवती प्रसाद सागर बसपा से जीते 2007 में कमलेश चंद्र दिवाकर 2012 में अरुणा कुमार कोरी और 2017 में भगवती प्रसाद सागर भाजपा से जीते थे.

ये प्रत्यासी थे अन्य क्षेत्र से

1957-1962में विधायक चुने गए मुरलीधर कुरील कानपुर के रहने वाले थे. वही 1967 से1980,1989 तक मोतीलाल देहलवी सियासी फेरबदल के साथ 5 बार के विधायक रहे है ये कानपुर के रहने वाले थे वही 1985 में कांग्रेस से हनुमान कुरील भी कानपुर के निवासी थे 1991 में वही तीन बार के विधायक रहे शिव कुमार बेरिया भी कानपुर शहर के रहने वाले थे2007 में विधायक बने कमलेश चंद्र मूल रूप से बांगरमऊ के रहने वाले थे 2012 में विधायक बनी अरुणा कोरी भी कानपुर नगर की रहने वाली थी.

रिपोर्ट - आयुष तिवारी

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