1. home Hindi News
  2. election
  3. up assembly elections
  4. swami prasad maurya may face trouble in padrauna seat due to former union minister rpn singh join bjp slt

पडरौना से मुश्किल हो सकती है स्वामी प्रसाद मौर्य की राह, RPN Singh हुए भाजपा में शामिल, जानें पूरा मामला 

कांग्रेस के बड़े सितारे रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह आज भाजपा में शामिल हो गए है. उनके भाजपा में आने से अब पडरौना में स्वामी प्रसाद मौर्य की जीत की राह मुश्किल हो सकती है.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Gorakhpur
Updated Date
पडरौना से मुश्किल हो सकती है स्वामी प्रसाद मौर्य की राह
पडरौना से मुश्किल हो सकती है स्वामी प्रसाद मौर्य की राह
Prabhat Khabar

Gorakhpur News: कांग्रेस के बड़े सितारे रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह (रतनजीत प्रताप नारायण) आज भाजपा में शामिल हो गये हैं. उनके पार्टी बदलने से कांग्रेस को काफी बड़ा झटका लगा है. इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के नेताओं के माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंचती दिख रही हैं. पडरौना राजघराने से ताल्लुक रखने वाले आरपीएन की गिनती पूर्वांचल के कद्दावर नेताओं में होती है. राजघराने से ताल्लुक होने के नाते हर वर्ग में उनका काफी सम्मान है.

आरपीएन सिंह खुद पिछड़ी जाति का होने के नाते उनकी पिछड़ी जातियों में अच्छी पकड़ मानी जाती है. हाल ही में स्वामी प्रसाद मौर्य सपा में शामिल हुए. अब बात यह है कि स्वामी प्रसाद मौर्य जिस पडरौना विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं, वह आरपीएन की व्यक्तिगत मजबूती वाला इलाका है और वह यहां से लगातार तीन बार जीत की जीत भी चुके हैं. इसे स्वीकार करने में कोई गुरेज नहीं करेगा कि वर्तमान चुनाव में आरपीएन सिंह की इस क्षेत्र में व्यक्तिगत पकड़ अब भाजपा को मजबूत करेगी.

आरपीएन सिंह के भाजपाई होने पर ठेस भले ही कांग्रेस को लगी है, लेकिन दर्द समूचे विपक्ष के लिए उभरेगा. पूर्व केंद्रीय मंत्री एक कुशल संगठनकर्ता भी माने जाते हैं. उनके पास कांग्रेस में झारखंड राज्य का सांगठनिक प्रभार भी था. अपने साथ कार्यकर्ताओं को जोड़कर रखना उनकी खूबी मानी जाती है. 1996, 2002 और 2007 के विधानसभा चुनाव में वह उस दौर में कांग्रेस के लिए पडरौना विधानसभा सीट से जीतते रहे, जब पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का वोट बैंक लगभग डूब चुका था.

2009 में लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. तब से यहां दो बार बसपा और एक बार (गत चुनाव में) भाजपा के टिकट पर स्वामी प्रसाद मौर्य चुनाव जीतते रहे हैं. अब जबकि स्वामी प्रसाद मौर्य सपा में शामिल हो गए हैं और पडरौना राजघराने के कुंवर भाजपा संग आ गए हैं, तो यहां की लड़ाई बेहद दिलचस्प हो गई है. बेटे को ऊंचाहार की सीट न दिलवा पाए स्वामी के सामने पडरौना से भी लखनऊ की राह आसान नहीं दिख रही होगी.

सपा और स्वामी प्रसाद मौर्य खेमे में चिंता, इस बात को लेकर होगी कि कहीं आरपीएन को भाजपा पडरौना से प्रत्याशी न बना दे. टिकट का फैसला तो पार्टी को करना है, लेकिन आरपीएन के आने से उनकी व्यक्तिगत पकड़ का लाभ अब भाजपा के ही खाते में आएगा.

रिपोर्ट- कुमार प्रदीप, गोरखपुर

Share Via :
Published Date

संबंधित खबरें

अन्य खबरें