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UP Chunav: जयंत से पहले बीजेपी ने अजित चौधरी की जयंती पर किया नमन, किसानों का अव्वल पैरोकार बनने की रेस?

राष्ट्रीय लोकदल (रालोद/RLD) के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष चौधरी अजित सिंह की जयंती 12 फरवरी को है. मगर उनके बेटे और वर्तमान में रालोद चीफ जयंत अपने पिता को सोशल मीडिया पर याद करने में थोड़ा देरी कर गए हैं.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Lucknow
Updated Date
चौधरी अजित सिंह ने यूएस की नौकरी छोड़ संभाली थी पिता की राजनीतिक विरासत.
चौधरी अजित सिंह ने यूएस की नौकरी छोड़ संभाली थी पिता की राजनीतिक विरासत.
पीटीआई फाइल फोटो

Lucknow News: यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के 7 चरणों में से पहला बीत चुका है. शनिवार को दूसरे चरण के लिए भी प्रचार बंद हो जाएगा. इस बीच सबसे बड़ा बनकर उभरा है, किसानों का. सभी राजनीतिक दल खुद को किसानों का सबसे बड़ा पैरोकार साबित करने पर तुले हैं.

यह ट्वीट डिप्टी सीएम के ट्वीटर हैंडल से सुबह 11.42 बजे किया गया था.
यह ट्वीट डिप्टी सीएम के ट्वीटर हैंडल से सुबह 11.42 बजे किया गया था.
Screenshot

इस बीच राष्ट्रीय लोकदल (रालोद/RLD) के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष चौधरी अजित सिंह की जयंती 12 फरवरी को है. मगर उनके बेटे और वर्तमान में रालोद चीफ जयंत अपने पिता को सोशल मीडिया पर याद करने में थोड़ा देरी कर गए हैं. वहीं, बीजेपी की ओर से अजित सिंह को नमन किया गया है. शनिवार 12 फरवरी को अजित चौधरी की जयंती है.

खबर लिखे जाने तक रालोद प्रमुख के ट्वीटर हैंडल पर नहीं था जयंती संबंधी कोई ट्वीट.
खबर लिखे जाने तक रालोद प्रमुख के ट्वीटर हैंडल पर नहीं था जयंती संबंधी कोई ट्वीट.
Screenshot

उनके बेटे जयंत चौधरी से पहले यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक ट्वीट के जरिए उन्हें याद किया. यह ट्वीट डिप्टी सीएम के ट्वीटर हैंडल से सुबह 11.42 बजे किया गया था. वहीं, रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के ट्वीटर हैंडल पर तब तक इस बारे में कोई ट्वीट नहीं किया गया था. बता दें कि रालोद की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने की थी. इस पार्टी को मुख्यत: किसानों की हक की लड़ाई के लिए जाना जाता था.

देश में वर्तमान में किसानों का सबसे बड़ा पैरोकार बनने की होड़ मची हुई है. सभी राजनीतिक दलों की ओर से जारी किए गए घोषणा पत्रों में भी किसानों के पक्ष में कई तरह की लोकलुभावन घोषणाएं की गई हैं. हर फसल की एमएसपी तक लागू करने का ऐलान किया गया है. किसान आंदोलन के बाद से देश की राजनीति में जिस तरह से किसानी का मुद्दा हावी हुआ है, उसे देखकर सभी राजनीतिक दलों में किसानों का सबसे बड़ा पैरोकार बनने की रेस सी मची हुई है. बता दें कि चौधरी अजित सिंह प्रतिभाशाली टेक्नोक्रेट थे. वह उस समय अमेरिका में आइबीएम कंपनी में कार्यरत थे. यह वह दौर था जब गिने-चुने भारतीय लोगों को ऐसी प्रतिष्ठित कंप्यूटर कंपनी में काम का मौका मिलता था.

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