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बहुत कठिन था बीजेपी छोड़ना, बोले उत्पल पर्रिकर- नहीं लड़ूंगा निर्दलीय चुनाव अगर बीजेपी कर दे ये काम...

उत्पल पर्रिकर ने बीजेपी से कहा है कि अगर पार्टी किसी अच्छे प्रत्याशी को वहां से टिकट देती है तो वो इस सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे. गौरतलब है कि बीजेपी ने मौजूदा विधायक और पार्टी प्रत्याशी अतानासियो मॉन्सरेट को बतौर उम्मीदवार खड़ा किया है.

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बहुत कठिन था बीजेपी छोड़ना- उत्पल पर्रिकर
बहुत कठिन था बीजेपी छोड़ना- उत्पल पर्रिकर
Twitter, File

गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर पणजी सीट से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे. समाचार एजेंसी पीटीआई से हवाले से खबर है कि उन्होंने बीजेपी से कहा है कि अगर पार्टी किसी अच्छे प्रत्याशी को वहां से टिकट देती है तो वो इस सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे. गौरतलब है कि बीजेपी ने मौजूदा विधायक और पार्टी प्रत्याशी अतानासियो मॉन्सरेट को बतौर उम्मीदवार खड़ा किया है.

नहीं था कोई और विकल्प: बता दे, बीजेपी छोड़ने के बाद उत्पल पर्रिकर ने घोषणा की थी कि वह राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव पणजी से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि मेरे पास और कोई विकल्प नहीं बचा था. इसलिए मैंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. अब मैं पणजी से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ूंगा.

हमेशा मेरे दिल में रहेगी भाजपा: उत्पल पर्रिकर ने ये भी कहा है कि, भले ही उन्होंने बीजेपी छोड़ दी हो लेकिन वो पार्टी से अलग नहीं हुए हैं. बीजेपी हमेशा उनके दिल में रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफा एक औपचारिकता थी, क्योंकि मेरे पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था.

कोई न करें राजनितिक भविष्य की चिंता: उत्पल पर्रिकर ने कहा है कि कोई भी उनके राजनितक भविष्य को लेकर चिंता न करे. उन्होंने कहा कि उनके राजनितिक भविष्य का फैसला गोवा के लोग करेंगे. उन्होंने कहा कि, यह मेरे लिए बहुत मुश्किल विकल्प है, मैं यह गोवा के लोगों के लिए कर रहा हूं.

मेरे पिता को भी पार्टी से बाहर करने की हुई थी कोशिश: उत्पल ने कहा कि उन्हें टिकट नहीं दिया जाना 1994 की उस स्थिति के समान है, जब उनके पिता को पार्टी से बाहर निकालने की कोशिश की गई थी. उन्होंने कहा, उस समय मनोहर पर्रिकर को बाहर इसलिए निकाला नहीं जा सका था, क्योंकि उनके पास लोगों का समर्थन था. उन्होंने कहा वे (उनके पिता के विरोधी) लोग अब भी पार्टी में ‘‘ऊंचे पदों'' पर बैठे हैं, जबकि उनके जैसा व्यक्ति ‘‘लोगों के साथ” है.

Posted by: Pritish Sahay

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