Success Story: यूपीएससी परीक्षा की तैयारी यानी कि कठिनाई के साथ-साथ आपका रिश्ता संघर्ष से भी जुड़ गया. लेकिन आज हम जिस कैंडिडेट की कहानी आपको बताने जा रहे हैं, उनकी लाइफ में पहले से ही इतना स्ट्रगल था कि UPSC ने उन्हें बस स्ट्रॉन्ग किया है. हम बात कर रहे हैं गुजरात के रहने वाले स्मित पंचाल की, जिनके पिता लोहार हैं. स्मित के पास कोचिंग तक की फीस नहीं थी. फिर भी उन्होंने अपनी किस्मत बदलने का सपना देखा और परीक्षा पास कर ली.
पापा लोहार बेटे ने क्रैक की UPSC परीक्षा
स्मित पंचाल का जन्म गुजरात के अहमदाबाद के साधारण से परिवार में हुआ था. उनके पिता लोहार हैं. एक इंटरव्यू में स्मित ने कहा कि पापा को हमेशा से कड़ी मेहनत करते देखा था. कई बार तो उनके हाथों में छाले हो जाते थे. कई बार कोई चोट लग जाती थी. लेकिन वे परिवार के लिए मेहनत करते रहते थे. मैं मन-ही-मन सोचता था कि जल्द-से-जल्द पापा को इस काली मजदूरी से निकालना है.
कहां से मिली IAS बनने की प्रेरणा?
स्मित ने कहा कि उन्होंने 10वीं के बाद ही यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने का मन बना लिया था. पापा की कंडीशन बदलने की जिद्द और कलेक्टर को मिलने वाला सम्मान देखकर उन्होंने IAS बनने का फैसला किया.
कॉलेज में हासिल किया गोल्ड मेडल
22 की उम्र में अपने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल करने वाले स्मित ने IAS बनने का सपना तो देख लिया. लेकिन उनके पास न पैसे थे और न रिसोर्स. फैमिली बैकग्राउंड की बात करें तो दूर-दूर तक कोई सिविल सेवा में नहीं था, ऐसे में गाइडेंस की भी कमी थी. उन्होंने पहले ग्रेजुएशन पर फोकस किया और अहमदाबाद के LD Arts College से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. वे कॉलेज के गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं.
चचेरे भाई ने की पैसों से मदद
कॉलेज पास करने के बाद स्मित ने अपना पूरा फोकस सिविल सेवा की तैयारी में लगा दिया. लेकिन बिना कोचिंग के उन्हें भी पता था कि तैयारी अधूरी है. ऐसे में चचेरे भाई ने पैसों से उनकी मदद की और एक साल का खर्च देकर दिल्ली भेजा.
पहले प्रयास में मिली असफलता
दिल्ली पहुंचने के बाद स्मित को ऐसा लगा कि वे अब अपने सपनों के बहुत करीब हैं. लेकिन उन्हें धक्का तब लगा जब प्रीलिम्स में CSAT में कुछ गड़बड़ी के कारण वे सेलेक्शन से एक स्टेप पीछे रह गए. पास में पैसे थे नहीं कि दोबारा तैयारी शुरू की जा सके. ऐसे में वे दिल्ली से वापस अहमदाबाद लौट गए.
फीस के लिए करनी पड़ी कोचिंग में नौकरी
स्मित भले ही एक स्टेप पीछे हो गए थे लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. अहमदाबाद आकर एक कोचिंग संस्थान में बतौर रिसेप्शनिस्ट ज्वॉइन किया और एक साल तक काम करके पैसे जुटाए. इस दौरान वे 5-6 घंटे पढ़ने के लिए भी समय निकाला करते थे. यही समय था जब उन्होंने लोगों के ताने भी सुने. जिस कोचिंग में काम किया करते थे, वहां लोग उन्हें कहा करते थे कि 6 बार कोशिश करने के बाद भी इंटरव्यू तक नहीं पहुंच पाएंगे. इन बातों से स्मित को बुरा तो लगता था कि लेकिन वे अपने लक्ष्य से कभी भटके नहीं.
2024 में पाई सफलता
साल भर नौकरी करके पंचाल ने पैसे जुटाए और फिर जॉब छोड़ दी. वापस से दिल्ली गए और परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. दिन रात मेहनत करके UPSC 2024 में ऑल इंडिया रैंक के साथ 30वीं पोजिशन हासिल की.
रिजल्ट देखकर खुशी से झूम उठे
स्मित पंचाल की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक तंगी झेल रहे हैं और जिनके पास कोई मार्गदर्शन नहीं है. जिस दिन रिजल्ट आया था स्मित पंचाल अपने पिता के साथ काम पर गए थे. जब घर आकर रिजल्ट देखा तो वे खुशी से झूम उठें.
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