Prateek Mudgal UPSC Topper: अलीगढ़ के रहने वाले प्रतीक मुद्गल ने यूपीएससी (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा में कमाल कर दिया है. प्रतीक ने अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 54वीं रैंक हासिल कर जिले और अपने परिवार का नाम पूरे देश में रोशन किया है. उनकी यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इसके लिए उन्होंने किसी महंगे कोचिंग सेंटर का सहारा नहीं लिया है. बल्कि अपनी मेहनत और सेल्फ स्टडी के दम पर यह मुकाम पाया है. प्रतीक की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो सोचते हैं कि बिना कोचिंग के देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करना मुमकिन नहीं है.
Prateek Mudgal UPSC Topper: कौन है प्रतीक मुद्गल?
प्रतीक मूल रूप से अलीगढ़ के अतरौली के गनियावली गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता विजय मुद्गल एक जाने-माने वकील हैं और मां पुष्पा मुद्गल एक हाउसवाइफ हैं. प्रतीक के इस सफर की नींव उनके दादाजी सूर्यदेव ने रखी थी. उनके दादाजी ने एक बार उनसे कहा था, आईएएस बन जाओ, सब तुम्हें जानेंगे. बस यही बात प्रतीक के दिल में घर कर गई और उन्होंने इसे ही अपना लक्ष्य बना लिया.
अपने दादा जी के साथ प्रतीक
Prateek Mudgal UPSC Topper: कोचिंग नहीं, सेल्फ स्टडी से शुरू की तैयारी
प्रतीक ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अलीगढ़ से ही की. इसके बाद उन्होंने एएमयू (AMU) से साल 2024 में बीएएलएलबी (BA LLB) की डिग्री ली. लॉ की पढ़ाई के दौरान ही उनका इरादा पक्का हो गया था. तैयारी के लिए वह दिल्ली तो गए, लेकिन वहां किसी बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेने के बजाय खुद से ही पढ़ाई की.
नौकरी छोड़ी और यूपीएससी परीक्षा में लग गए
UPSC की तैयारी के दौरान प्रतीक ने यूपीसीडीएस (UPCDS) की परीक्षा भी दी थी, जिसमें उन्होंने 19वीं रैंक हासिल की. वहां उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपये महीने की सैलरी वाली नौकरी मिल रही थी, लेकिन उनका सपना आईएएस (IAS) बनना था. प्रतीक ने उस बड़ी नौकरी को छोड़ने का फैसला लिया और यूपीएससी की तैयारी में लग गए.
चाय की टपरी से मिला जीवन का ज्ञान
प्रतीक (Prateek Mudgal UPSC Topper) का अंदाज थोड़ा अलग है. उन्हें किताबें पढ़ने और फिल्में देखने के अलावा चाय की टपरी पर बैठकर लोगों की बातें सुनना बहुत पसंद है. उनका मानना है कि समाज को करीब से देखने और आम लोगों की बातचीत से जो प्रैक्टिकल नॉलेज मिलता है, वह किताबों में नहीं मिलता. शायद यही वजह थी कि उन्होंने अपने ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में फिलॉसफी को चुना, जिसमें उनकी गहरी रुचि थी.
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