Teacher without BEd: ITEP कोर्स नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के तहत शुरू किया गया है. इसका मकसद ऐसे शिक्षकों को तैयार करना है जो शुरुआत से ही प्रोफेशनल ट्रेनिंग के साथ पढ़ाई करें और स्कूलों में बेहतर शिक्षा दे सकें. दिल्ली यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) समेत कई यूनिवर्सिटी में इस कोर्स को शुरू किया गया है.
What is ITEP: क्या है ITEP कोर्स?
ITEP यानी Integrated Teacher Education Programme एक 4 साल का इंटीग्रेटेड कोर्स है. इसमें छात्र 12वीं के बाद सीधे एडमिशन ले सकते हैं. इस कोर्स की खास बात यह है कि इसमें ग्रेजुएशन और BEd दोनों की पढ़ाई एक साथ कराई जाती है.
अगर कोई छात्र BA करना चाहता है तो उसे BA-BEd की डिग्री मिलेगी. साइंस वाले छात्रों को BSc-BEd और कॉमर्स वालों को BCom-BEd की डिग्री दी जाएगी. इससे छात्रों का समय भी बचेगा और करियर भी जल्दी शुरू हो सकेगा.
BEd से क्यों है अलग?
पुराने सिस्टम में छात्रों को पहले 3 साल की ग्रेजुएशन करनी पड़ती थी और उसके बाद 2 साल का BEd करना पड़ता था. यानी कुल मिलाकर 5 साल लग जाते थे. लेकिन ITEP में यही पढ़ाई सिर्फ 4 साल में पूरी हो जाती है.
इसके अलावा छात्र शुरू से ही टीचर बनने की तैयारी करते हैं. उन्हें बाद में यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ती कि आगे क्या करना है. इस कोर्स में पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और स्कूल इंटर्नशिप पर भी ज्यादा ध्यान दिया जाता है.
Teacher without BEd: कैसे मिलेगा एडमिशन?
ITEP में एडमिशन लेने के लिए छात्रों को NCET परीक्षा पास करनी होगी. NCET का पूरा नाम National Common Entrance Test है. इस परीक्षा को NTA यानी National Testing Agency आयोजित करती है.
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इस एग्जाम में भाषा, विषय आधारित सवाल, जनरल टेस्ट और Teaching Aptitude से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं. परीक्षा पास करने के बाद छात्रों को देश के कई बड़े संस्थानों में एडमिशन का मौका मिलता है.
किन कॉलेजों में मिल रहा है मौका?
ITEP को धीरे-धीरे देश के बड़े शिक्षण संस्थानों में लागू किया जा रहा है. कई सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सरकारी कॉलेज, IIT और NIT भी इस कोर्स से जुड़ चुके हैं. इसे भविष्य का सबसे बड़ा टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम माना जा रहा है.
2030 तक बदल सकता है पूरा सिस्टम
नई शिक्षा नीति के अनुसार सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक स्कूल शिक्षकों के लिए 4 साल की इंटीग्रेटेड डिग्री को ही मुख्य योग्यता बना दिया जाए. इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में 2 साल वाले BEd कोर्स की अहमियत कम हो सकती है.
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