ये क्या! ईरान पहुंचकर मजबूत हो जाता है रुपया और इजरायल में कमजोर, ऐसा क्यों?

Rupees: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत पर भी गहराता जा रहा है. इस संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था और रुपये की स्थिति प्रभावित हो रही है. दिलचस्प यह है कि ईरान में रुपया मजबूत जबकि इजराइल में कमजोर हो जाता है. यह अंतर करेंसी विनिमय दरों और दोनों देशों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा है. भारत के 100 रुपये इन देशों में अलग-अलग मूल्य रखते हैं.

Rupees: मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव का असर केवल उन देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत जैसे देशों पर भी इसका गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है. अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो यह प्रभाव और गंभीर हो सकता है. इसका मुख्य कारण भारत की इजरायल में कई कंपनियों द्वारा किया गया निवेश और दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध हैं. सबसे बड़ी बात है कि ईरान पहुंचकर भारतीय मुद्रा रुपया मजबूत हो जाता है, जबकि वही रुपया इजरायल पहुंचकर कमजोर पड़ जाता है. ऐसा क्यों? आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

तेल की कीमतों पर असर

ईरान और इजरायल के बीच की इस तनातनी का सीधा असर तेल बाजार पर पड़ रहा है. भारत अपनी बड़ी जरूरत का कच्चा तेल मध्य पूर्व देशों से आयात करता है. जैसे ही वहां तनाव बढ़ता है, तेल की कीमतों में उछाल आना तय होता है. इससे न केवल भारत की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है, बल्कि रुपये की वैल्यू पर भी नकारात्मक असर पड़ता है.

ईरान और इजरायल की करेंसी का हाल

अब अगर हम करेंसी की बात करें, तो भारत की मुद्रा इन दोनों देशों की तुलना में अलग स्थिति में है. ईरान की करेंसी को ईरानियन रियाल कहा जाता है. मौजूदा विनिमय दर के मुताबिक, 1 भारतीय रुपया 488.10 ईरानी रियाल के बराबर होता है. इसका अर्थ है कि भारत का रुपया ईरान की करेंसी के मुकाबले बेहद मजबूत है. वहीं, इजरायल की करेंसी को न्यू शेकेल कहा जाता है। यह भारत की मुद्रा की तुलना में काफी मजबूत है। 1 इजरायली न्यू शेकेल 24.61 भारतीय रुपये के बराबर है.

ईरान-इजरायल में भारत के 100 रुपये की वैल्यू

  • ईरान में 100 रुपये कन्वर्ट करने पर 48,810.46 रियाल मिलेंगे. वहीं, 1000 रुपये कंवर्ट करने पर 4,88,104.59 रियाल मिलेगा
  • इजराइल में 100 रुपये के बदले केवल 4.06 न्यू शेकेल मिलेंगे और 1000 रुपये पर सिर्फ 40.63 न्यू शेकेल हासिल होगा.

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भारत पर ईरान-इजरायल के जंग का असर

ईरान और इजराइल के बीच चल रहा यह संघर्ष न केवल वैश्विक कूटनीति को चुनौती दे रहा है, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और करेंसी विनिमय दर पर भी असर डाल रहा है. आने वाले समय में इस क्षेत्र की स्थिरता भारत सहित पूरी दुनिया की आर्थिक सेहत के लिए बेहद अहम होगी.

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लेखक के बारे में

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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