Personal Loan: एक दौर था जब पर्सनल लोन को केवल आर्थिक तंगी या मजबूरी से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब बैंकिंग सेक्टर में एक चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है. मध्यम और उच्च आय वर्ग के लोग, जिनके पास पर्याप्त बचत और निवेश मौजूद है, वे भी अपनी एफडी (FD) या म्यूचुअल फंड तोड़ने के बजाय पर्सनल लोन लेना बेहतर समझ रहे हैं. बाजार के जानकारों का मानना है कि पर्सनल लोन अब कोई सामाजिक बुराई (Taboo) नहीं रह गया है, बल्कि इसे एक वित्तीय सुविधा के तौर पर देखा जा रहा है.
निवेश सुरक्षित रखने की नई रणनीति
कोटक महिंद्रा बैंक जैसे बड़े संस्थानों के विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राहकों का प्रोफाइल अब पूरी तरह बदल चुका है. अमीर लोग अपनी लंबी अवधि की जमा-पूंजी या निवेश में हाथ लगाने के बजाय अपनी जरूरतों के लिए बैंक से कर्ज लेना पसंद कर रहे हैं. इससे उनका निवेश बढ़ता रहता है और उनकी तात्कालिक जरूरतें जैसे घर की मरम्मत, विदेश यात्रा या बच्चों की पढ़ाई बिना किसी मानसिक दबाव के पूरी हो जाती हैं.
RBI की सख्ती और बैंकों का सेफ गेम
डिजिटल ऐप्स के जरिए बांटे गए असुरक्षित लोन पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सख्ती के बाद बैंकों ने अपने नियम कड़े कर दिए हैं. अब बैंक केवल उन ग्राहकों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनका क्रेडिट स्कोर (CIBIL) मजबूत है और जिनके साथ बैंक का पुराना रिश्ता है. इक्विफैक्स (Equifax) जैसे क्रेडिट ब्यूरो के मुताबिक, बिना किसी क्रेडिट हिस्ट्री वाले नए ग्राहकों के लिए अब लोन मिलना मुश्किल हो गया है, जबकि भरोसेमंद ग्राहकों के लिए बैंक पलकें बिछाए बैठे हैं.
15 सेकंड में में क्रेडिट स्कोर हो जाता है चेक
पर्सनल लोन की इस बढ़ती लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह है इसकी रफ़्तार. एपीआई (API) और आधुनिक सॉफ्टवेयर की मदद से बैंक अब महज 10 से 15 सेकंड के भीतर क्रेडिट रिपोर्ट चेक कर लेते हैं. जिन ग्राहकों का लेनदेन रिकॉर्ड शानदार है, उन्हें बैंक ‘सिंगल डिजिट’ यानी 10% से भी कम ब्याज दर पर प्री-अप्रूव्ड लोन ऑफर कर रहे हैं. यही कारण है कि लोग अब शादियों और छुट्टियों के लिए भी बिना किसी हिचकिचाहट के डिजिटल लोन का रास्ता चुन रहे हैं.
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