Vedanta Challenges Adani JAL Bid: दिग्गज कारोबारी अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) को खरीदने की रेस में एक नया मोड़ ला दिया है. वेदांता ने अडानी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मिली मंजूरी के खिलाफ NCLAT (अपीलीय न्यायाधिकरण) का दरवाजा खटखटाया है.
क्या है पूरा विवाद?
जेपी एसोसिएट्स भारी कर्ज में डूबी हुई है और इसे बेचने के लिए दिवाला प्रक्रिया चल रही थी. इस रेस में अडानी, वेदांता और डालमिया भारत जैसे बड़े नाम शामिल थे. पिछले साल नवंबर में कर्जदाताओं ने अडानी ग्रुप की योजना को पसंद किया और उसे मंजूरी दे दी. हाल ही में 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने भी आधिकारिक तौर पर अडानी की बोली पर मुहर लगा दी थी. अब वेदांता ने इसी फैसले को चुनौती दी है.
क्यों हो रही है इस कंपनी के लिए इतनी लड़ाई?
भले ही जेपी एसोसिएट्स 57,185 करोड़ रुपये के भारी कर्ज में डूबी हो, लेकिन इसके पास मौजूद संपत्तियां बेहद कीमती हैं. यही कारण है कि देश के दो सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप इसे हासिल करना चाहते हैं:
- कंपनी के पास सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग के बड़े प्लांट और बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स हैं.
- जेपी ग्रुप के पास प्राइम लोकेशन पर जमीनें और लग्जरी होटल्स का बड़ा पोर्टफोलियो है.
- बिजली और इंजीनियरिंग सेक्टर में भी कंपनी की मजबूत पकड़ रही है.
आगे क्या होगा?
अडानी ग्रुप ने जेपी एसोसिएट्स को खरीदने की बाजी जीत ली थी, लेकिन हार मानने के बजाय वेदांता ग्रुप ने अब ऊपरी अदालत में अपील की है. अब कोर्ट तय करेगा कि अडानी का मालिकाना हक बरकरार रहेगा या प्रक्रिया को फिर से परखा जाएगा. वेदांता की इस अपील पर अब सोमवार को चेयरमैन न्यायमूर्ति अशोक भूषण की दो सदस्यीय पीठ सुनवाई करेगी. यह सुनवाई तय करेगी कि जेपी एसोसिएट्स का भविष्य अडानी के हाथों में सुरक्षित रहेगा या अधिग्रहण की प्रक्रिया को फिर से परखा जाएगा.
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