Union Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) को लेकर बढ़ाने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय का लक्ष्य 12.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया है. यह चालू वित्त वर्ष 2025-26 के 11.2 लाख करोड़ रुपये की तुलना में एक लाख करोड़ रुपये अधिक है. सरकार का मानना है कि कैपेक्स बढ़ाने से आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
बुनियादी ढांचे पर रहेगा विशेष फोकस
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार देशभर में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को प्राथमिकता देती रहेगी. खास तौर पर छोटे और मझोले शहरों में सड़क, परिवहन, शहरी सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास का लाभ केवल बड़े महानगरों तक सीमित न रहे, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुंचे.
इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जोखिम गारंटी कोष का प्रस्ताव
बजट भाषण के दौरान निर्मला सीतारमण ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए रिस्क गारंटी फंड स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा. इसका उद्देश्य निजी निवेश को प्रोत्साहित करना और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े वित्तीय जोखिम को कम करना है. इससे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
घरेलू विनिर्माण को मिलेगा बल
वित्त मंत्री ने कहा कि घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए निर्माण और अवसंरचना उपकरणों के संवर्धन को लेकर एक नई योजना शुरू की जाएगी. इस कदम से ‘मेक इन इंडिया’ को गति मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही, इससे स्थानीय उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर को भी लाभ पहुंचने की संभावना है.
स्किल डेवलपमेंट पर भी सरकार का जोर
बजट 2026 में स्किल डेवलपमेंट को लेकर भी अहम घोषणा की गई. वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार आईसीएआई, आईसीएसआई जैसे पेशेवर संस्थानों को अल्पकालिक ‘मॉड्यूलर’ पाठ्यक्रम तैयार करने में सहायता देगी. इससे युवाओं को बदलती उद्योग जरूरतों के अनुसार तेजी से कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा.
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विकास और निवेश का रोडमैप
कुल मिलाकर बजट 2026-27 में बढ़ा हुआ पूंजीगत व्यय, इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा और स्किल डेवलपमेंट जैसे प्रावधान सरकार के दीर्घकालिक विकास विजन को दर्शाते हैं. इन कदमों से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने और भारत की विकास दर को स्थिर मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
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