Term Insurance for Homemakers: एक भारतीय परिवार में महिला उस नींव की तरह होती है, जिसके बिना पूरे घर अधूरा है. हम अक्सर उनकी मेहनत को बिना सैलरी वाला काम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सच तो यह है कि उनके काम की आर्थिक वैल्यू बहुत ज्यादा है. अगर आप अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करना चाहते हैं, तो गृहणी (Homemaker) के नाम पर टर्म इंश्योरेंस लेना अब वक्त की जरूरत बन गया है.
होममेकर का बीमा क्यों है जरूरी?
एक होममेकर घर के अनगिनत काम संभालती है. जैसे बच्चों की परवरिश से लेकर बुजुर्गों की देखभाल और रसोई तक. यदि भविष्य में उनके साथ कोई अनहोनी होती है, तो इन कामों को संभालने के लिए परिवार को किसी प्रोफेशनल की मदद लेनी पड़ेगी, जिसका खर्च काफी अधिक हो सकता है. टर्म इंश्योरेंस का क्लेम अमाउंट उस वक्त आर्थिक बोझ को कम करने और बच्चों की शिक्षा जैसे बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में काम आता है. इसके अलावा, आजकल महिलाएं कम उम्र में गंभीर बीमारियों का शिकार हो रही हैं, ऐसे में आप पॉलिसी के साथ क्रिटिकल इलनेस राइडर भी जोड़ सकते हैं, जो बीमारी के वक्त इलाज का मोटा खर्च उठाने में मदद करता है.
पॉलिसी लेने के लिए क्या है योग्यता?
भारत में लगभग सभी बड़ी सरकारी और प्राइवेट कंपनियां जैसे LIC, HDFC Life, ICICI Prudential और SBI Life होममेकर को टर्म प्लान दे रही हैं. इसके लिए कुछ बुनियादी शर्तें हैं:
- उम्र: महिला की आयु 18 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए.
- दस्तावेज: आवेदन के लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे बेसिक KYC डॉक्यूमेंट्स जरूरी हैं.
- मेडिकल चेकअप: इंश्योरेंस कंपनी की शर्तों के अनुसार मेडिकल टेस्ट कराना पड़ सकता है.
- कवर की राशि: होममेकर को कितना बीमा (Sum Assured) मिलेगा, यह उनके पति की आय और परिवार की देनदारियों पर निर्भर करता है ताकि ओवर-इंश्योरेंस न हो.
प्रीमियम का गणित क्या है?
होममेकर के लिए टर्म प्लान काफी किफायती होते हैं. उदाहरण के तौर पर, अगर 41 साल की कोई महिला 25 लाख रुपये का कवर (65 वर्ष की उम्र तक) लेती है, तो उसे हर महीने करीब 900 रुपये का प्रीमियम देना होगा. वहीं, 1 करोड़ रुपये के बड़े कवर के लिए यह राशि 1,500 रुपये से 1,600 रुपये प्रति माह के बीच हो सकती है.
प्लान चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें?
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी न चुनें. पॉलिसी लेते समय परिवार की लाइफस्टाइल, बच्चों की पढ़ाई का खर्च, चल रहे लोन और भविष्य की महंगाई का अंदाजा जरूर लगाएं. सबसे जरूरी बात यह है कि उस कंपनी को चुनें जिसका ‘क्लेम सेटलमेंट रेशियो’ (Claim Settlement Ratio) अच्छा हो, ताकि जरूरत के समय परिवार को परेशान न होना पड़े.
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