अब बाहर से खाना मंगाना हुआ और महंगा, स्विगी ने भी बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

Swiggy & Zomato Platform Fee Hike: स्विगी ने प्लेटफॉर्म फीस 17% बढ़ाकर ₹17.58 कर दी है. जोमैटो के बाद अब स्विगी से खाना मंगाना भी महंगा हो गया है. बढ़ती ऑपरेटिंग लागत के कारण यह फैसला लिया गया है.

Swiggy & Zomato Platform Fee Hike: ऑनलाइन फूड डिलीवरी के शौकीनों के लिए एक बुरी खबर है. जोमैटो के बाद अब दिग्गज कंपनी स्विगी (Swiggy) ने भी अपने प्लेटफॉर्म फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है. 24 मार्च 2026 से लागू हुए इन नए नियमों के बाद अब हर ऑर्डर पर ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे चुकाने होंगे.

प्लेटफॉर्म फीस में 17% का बड़ा इजाफा

स्विगी ने अपने हर ऑर्डर पर ली जाने वाली प्लेटफॉर्म फीस को ₹14 से बढ़ाकर ₹17.58 (GST सहित) कर दिया है. यानी अब आपको हर बार खाना ऑर्डर करने पर ₹3.58 अधिक देने होंगे. कंपनी का कहना है कि डिलीवरी ऑपरेशंस की बढ़ती लागत और संचालन खर्चों को मैनेज करने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था.

3 साल में ₹2 से ₹17 तक का सफर

दिलचस्प बात यह है कि जब अप्रैल 2023 में पहली बार प्लेटफॉर्म फीस शुरू हुई थी, तब यह मात्र ₹2 थी. पिछले 3 सालों में कंपनी ने इसे कई बार बढ़ाया है.

  • अप्रैल 2023: ₹2 (शुरुआत)
  • अक्टूबर 2024: ₹10
  • अक्टूबर 2025: ₹14
  • मार्च 2026: ₹17.58 (वर्तमान)

जोमैटो और स्विगी अब एक समान

हाल ही में 20 मार्च को जोमैटो ने भी अपनी फीस बढ़ाकर ₹14.90 (बिना GST) कर दी थी. टैक्स जुड़ने के बाद अब जोमैटो और स्विगी दोनों की प्रभावी फीस लगभग ₹17.58 के बराबर हो गई है. यानी अब आप किसी भी ऐप से खाना मंगाएं, आपको लगभग एक जैसा ही एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा.

क्या होती है प्लेटफॉर्म फीस

प्लेटफॉर्म फीस वह फिक्स्ड चार्ज है जो आपके खाने के बिल, रेस्टोरेंट चार्ज और डिलीवरी फीस के अलावा वसूला जाता है.

  • समान शुल्क: चाहे आपका ऑर्डर ₹200 का हो या ₹2000 का, यह फीस हर ऑर्डर पर एक समान रहती है.
  • कारण: कंपनियां इस पैसे का इस्तेमाल अपनी टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने, कस्टमर सपोर्ट और ऐप के संचालन खर्चों को निकालने के लिए करती हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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