Airfare Regulation: अदालत ने सरकार को दो हफ्ते के भीतर भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 (Bharatiya Vayuyan Adhiniyam, 2024) के तहत बनाए गए नियम पेश करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि नए नियम सीलबंद लिफाफे (Sealed Cover) में अदालत के सामने पेश किए जाएं. अदालत ने यह भी साफ किया कि नियम संसद में पेश हुए हैं या नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता. केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि नए नियम तैयार है. फिलहाल उनका अनुवाद किया जा रहा है, जिसके बाद उन्हें संसद के सामने रखा जाएगा.
याचिका में क्या मांग की गई है?
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने दायर की है. याचिका में मांग की गई है कि:
- एयरलाइंस के किराए की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र नियामक (Independent Regulator) बनाया जाए.
- टिकट की कीमत तय करने में पारदर्शिता हो.
- यात्रियों के हितों की बेहतर सुरक्षा की जाए.
- निजी एयरलाइंस द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क और किराए पर निगरानी रखी जाए.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र श्रीवास्तव ने अदालत में कहा कि जब तक नए नियम लागू नहीं होते, तब तक पुराने नियम प्रभावी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि एयरफेयर में अचानक बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र व्यवस्था की जरूरत है.
यात्रियों की शिकायत आखिर क्या है?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अलग से कोई नियामक न होने की वजह से कई एयरलाइंस:
- डायनामिक प्राइसिंग के जरिए टिकट के दाम तेजी से बढ़ा देती हैं.
- टिकट के अलावा अलग-अलग छिपे हुए चार्ज वसूलती हैं.
- त्योहार, आपात स्थिति और खराब मौसम के दौरान मनमाने तरीके से किराया बढ़ाती हैं.
याचिका में यह भी कहा गया है कि कई एयरलाइंस ने इकोनॉमी क्लास के यात्रियों के लिए फ्री चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी है. इससे अतिरिक्त सामान पर यात्रियों को अलग से शुल्क देना पड़ता है, जिसे याचिका में एयरलाइंस की अतिरिक्त कमाई का जरिया बताया गया है.
भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 क्यों अहम है?
भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 जनवरी 2025 से लागू हो चुका है. इसका उद्देश्य भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को आधुनिक बनाना है. हालांकि, इसके तहत बनने वाले नियम अभी तक अंतिम रूप में लागू नहीं हुए हैं.
केंद्र सरकार पहले भी सुप्रीम कोर्ट को बता चुकी है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों की जांच कर रहा है. अब अदालत ने दो सप्ताह के भीतर नियम पेश करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद 3 अगस्त को मामले पर आगे सुनवाई होगी.
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