कच्चे तेल की आग में झुलसा दलाल स्ट्रीट, सेंसेक्स और निफ्टी में ऐतिहासिक गिरावट

Stock Market: जानकारों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी.

Stock Market: भारतीय शेयर बाजार के लिए 19 मार्च 2026 का दिन काफी निराशजनक रहा. पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार मचा दिया. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही जून 2024 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज की गई है.

बाजार का हाल: सेंसेक्स और निफ्टी की बड़ी गोताखोरी

बृहस्पतिवार को कारोबार खत्म होने तक बाजार पूरी तरह लाल निशान में डूबा नजर आया.

  • सेंसेक्स (Sensex): 2,497 अंक (3.26%) की भारी गिरावट के साथ 74,207 पर बंद हुआ. दिन के दौरान यह एक समय 2,753 अंक तक टूट गया था.
  • निफ्टी (Nifty): 775 अंक (3.26%) लुढ़ककर 23,002 के स्तर पर आ गया.

गिरावट के 3 मुख्य कारण

  1. कच्चे तेल में उबाल (Crude Oil Surge): ईरान द्वारा कतर के गैस प्लांट और कुवैत की रिफाइनरियों पर मिसाइल हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 6.75% उछलकर 114.8 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा मतलब है देश में महंगाई बढ़ना और अर्थव्यवस्था पर दबाव.
  2. एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) को दोहरा झटका: बाजार के दिग्गज एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे की खबर ने निवेशकों को डरा दिया. इसके चलते बैंक का शेयर 5% से ज्यादा टूट गया, जिसका बड़ा असर पूरे सेंसेक्स पर पड़ा.
  3. वैश्विक बाजारों में मंदी: सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बाजारों में डर का माहौल है. जापान का निक्की, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग बुरी तरह गिरे हैं. अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में भी भारी बिकवाली देखी जा रही है.

इन कंपनियों के शेयरों में रही सबसे ज्यादा गिरावट

  • बाजार की इस सुनामी में बैंकिंग और ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए.
  • प्रमुख नुकसान वाले शेयर: बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फिनसर्व और इटर्नल.
  • FII की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार से करीब 2,714 करोड़ रुपये निकाल लिए, जिससे गिरावट को और हवा मिली.

जानकारों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. निवेशकों को फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है.

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लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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