S&P Rating Upgrade: एसबीआई, एचडीएफसी और टाटा कैपिटल समेत 10 बड़े संस्थानों की रेटिंग बढ़ी

S&P Rating Upgrade: वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग बढ़ाने के बाद एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, टाटा कैपिटल, आईसीआईसीआई, एक्सिस, कोटक महिंद्रा, यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, बजाज फाइनेंस और एलएंडटी फाइनेंस समेत 10 बड़े वित्तीय संस्थानों की रेटिंग अपग्रेड कर दी है. एजेंसी ने कहा कि भारत के बैंक मजबूत आर्थिक वृद्धि, बेहतर संपत्ति गुणवत्ता, लाभप्रदता और आईबीसी सुधारों से लाभान्वित होंगे, जिससे अगले 12-24 महीनों में स्थिरता बनी रहेगी और बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट जोखिम कम होगा.

S&P Rating Upgrade: वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने शुक्रवार को भारत के शीर्ष 10 वित्तीय संस्थानों की दीर्घकालिक क्रेडिट रेटिंग बढ़ा दी. इनमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एचडीएफसी बैंक, टाटा कैपिटल सहित देश के सात प्रमुख बैंक और तीन बड़ी वित्तीय कंपनियां शामिल हैं. यह कदम भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग में सुधार के एक दिन बाद उठाया गया है, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है.

रेटिंग सुधार का मुख्य कारण

एसएंडपी ने अपने बयान में कहा कि भारत के वित्तीय संस्थान देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि, घरेलू बाजार पर फोकस और संरचनात्मक सुधारों का लाभ उठाते रहेंगे. एजेंसी ने इस सुधार के पीछे भारत की स्थिर बैंकिंग प्रणाली, संपत्ति की बेहतर गुणवत्ता और मजबूत लाभप्रदता को अहम कारण बताया.

किन-किन बैंकों और कंपनियों की रेटिंग बढ़ी

एसएंडपी ने जिन 10 वित्तीय संस्थानों की रेटिंग अपग्रेड की है, उनमें सात बैंक और तीन वित्तीय संस्थान शामिल हैं.

सात बैंक

  • भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई)
  • आईसीआईसीआई बैंक
  • एचडीएफसी बैंक
  • एक्सिस बैंक लिमिटेड
  • कोटक महिंद्रा बैंक
  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
  • इंडियन बैंक

तीन वित्तीय संस्थान

  • बजाज फाइनेंस
  • टाटा कैपिटल
  • एलएंडटी फाइनेंस

भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग में ऐतिहासिक सुधार

एसएंडपी का यह कदम भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 18 साल बाद अपग्रेड किए जाने के तुरंत बाद आया है. गुरुवार को एजेंसी ने भारत की रेटिंग बढ़ाकर ‘बीबीबी’ कर दी थी. यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक बुनियाद और विकास दर मजबूत बनी रहेगी.

एसएंडपी का क्या है अनुमान

एसएंडपी का अनुमान है कि भारत के बैंक अगले 12 से 24 महीनों में संपत्ति की गुणवत्ता, लाभप्रदता और पूंजीकरण बनाए रखेंगे, भले ही कुछ क्षेत्रों में आर्थिक दबाव बना रहे. एजेंसी के अनुसार, भारत के बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट जोखिम कम हुआ है, जिससे ऋण वितरण और निवेश गतिविधियों में तेजी आ सकती है.

आईबीसी कानून का सकारात्मक असर

एसएंडपी ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की सराहना करते हुए कहा कि इसने भारत में भुगतान संस्कृति और कानून के शासन को मजबूत किया है. इसके परिणामस्वरूप ऋण वसूली की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है, जिससे वित्तीय संस्थानों की स्थिरता में सुधार हुआ है.

सरकार की भूमिका और प्रभाव

एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि कई वित्तीय संस्थानों की रेटिंग भारत सरकार की क्रेडिट रेटिंग तक सीमित है, क्योंकि सरकार का बैंकिंग प्रणाली पर सीधा और अप्रत्यक्ष प्रभाव रहता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि बैंकिंग सेक्टर में भरोसा और स्थिरता बनी रहे.

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निवेशकों के लिए संदेश

रेटिंग में यह सुधार अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए संकेत है कि भारत का बैंकिंग सेक्टर अधिक सुरक्षित और लाभकारी हो रहा है. यह न केवल विदेशी पूंजी आकर्षित करेगा, बल्कि घरेलू निवेशकों के विश्वास को भी बढ़ाएगा. एसएंडपी का यह निर्णय भारत की आर्थिक और वित्तीय मजबूती का प्रमाण है. 18 साल बाद सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग में सुधार और उसके तुरंत बाद शीर्ष वित्तीय संस्थानों की रेटिंग अपग्रेड होना, यह दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में भारत का वित्तीय तंत्र और बैंकिंग सेक्टर और अधिक मजबूत और निवेशकों के लिए आकर्षक बनेगा.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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