Share Market: भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूती के साथ शुरुआत की. शुरुआती कारोबार में BSE Sensex और NIFTY 50 दोनों में अच्छी बढ़त देखने को मिली. सुबह करीब 9:17 बजे सेंसेक्स 591.41 अंक यानी 0.76% चढ़कर 78,157.57 पर पहुंच गया. वहीं निफ्टी 50 158.20 अंक यानी 0.66% की बढ़त के साथ 24,186.25 के स्तर पर कारोबार करता दिखा.
बाजार फिलहाल कमजोर लेकिन ओवरसोल्ड
Shrikant Chouhan, हेड इक्विटी रिसर्च, Kotak Securities के अनुसार फिलहाल बाजार का ट्रेंड कमजोर जरूर है, लेकिन यह ओवरसोल्ड स्थिति में भी है. उनका कहना है कि डे-ट्रेडर्स के लिए निफ्टी 24,000–23,900 और सेंसेक्स 77,500–77,200 अहम सपोर्ट जोन रहेंगे. अगर बाजार इन स्तरों से ऊपर बना रहता है तो इसमें रिकवरी जारी रह सकती है और निफ्टी 24,200–24,300 तथा सेंसेक्स 78,000–78,300 तक जा सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी सलाह दी कि अगर बाजार 24,200–24,300 के स्तर पर पहुंचे तो कमजोर लॉन्ग पोजिशन कम करना बेहतर रहेगा.
इन स्तरों के नीचे बढ़ सकता है बिकवाली का दबाव
चौहान के मुताबिक अगर निफ्टी 23,900 और सेंसेक्स 77,200 के नीचे फिसलते हैं, तो बाजार में बिकवाली का दबाव तेजी से बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में बाजार फिर से निफ्टी 23,700 / सेंसेक्स 76,500 के स्तर को टेस्ट कर सकता है. अगर गिरावट जारी रहती है तो इंडेक्स निफ्टी 23,500 और सेंसेक्स 76,000 तक भी जा सकते हैं.
वैश्विक घटनाओं का बाजार पर असर
बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट Ajay Bagga के अनुसार फिलहाल बाजार काफी हद तक हेडलाइन रिस्क पर चल रहा है. यानी वैश्विक घटनाओं और बयानों का सीधा असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz अभी भी वैश्विक तेल सप्लाई के लिए एक अहम और संवेदनशील मार्ग है. अगर यहां तनाव बढ़ता है या स्थिति बिगड़ती है तो कच्चे तेल की कीमतें फिर से तेजी से बढ़ सकती हैं.
बग्गा के मुताबिक वैश्विक बाजारों में अचानक बदलाव तब देखने को मिला जब अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि सैन्य अभियान तय समय से काफी आगे है और लगभग पूरा हो चुका है. इस बयान के बाद तेल बाजार में लंबी पोजिशन रखने वाले निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई.
कच्चे तेल में नरमी से भारत को राहत
तनाव बढ़ने की आशंका के चलते Brent Crude पहले 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. लेकिन बाद में कीमतों में गिरावट आई और यह फिर से 86 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गया. विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि इससे आयातित महंगाई और राजकोषीय घाटे पर दबाव कम हो सकता है.
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