नेपाल ने भारतीय आमों पर लगाई रोक! कीटनाशकों की अधिकता बनी बड़ी वजह

Published by : Abhishek Pandey Updated At : 09 Jun 2026 6:45 PM

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Nepal Bans Indian Mango Imports : भारत से नेपाल जाने वाले आमों पर लगा बैन! कीटनाशकों (Pesticides) की अधिक मात्रा और सीमा पर जांच की कमी को बताया वजह. नेपाल के बाजारों में आम और केले के दाम आसमान पर पहुंचे.

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Nepal Bans Indian Mango Imports : गर्मियों के इस सीजन में अगर आप नेपाल में हैं और भारतीय आमों के स्वाद का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो आपको बड़ा झटका लग सकता है. नेपाल सरकार ने भारत से आने वाले आमों के आयात को अस्थाई रूप से प्रतिबंधित (Restrict) कर दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय आमों में अत्यधिक कीटनाशकों (Excessive Pesticides) की मौजूदगी की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है.

इसके अलावा, भारत-नेपाल सीमा के सीमावर्ती क्षेत्रों (विशेषकर मधेस प्रांत में) में क्वारंटाइन सुविधाओं (Quarantine Facilities) यानी फल परीक्षण प्रयोगशालाओं की भारी कमी है. जांच की पुख्ता व्यवस्था न होने के कारण नेपाल सरकार ने बिना टेस्टिंग के भारतीय आमों को अपने देश में एंट्री देने से मना कर दिया है.

नेपाल के किसानों की लगी लॉटरी

नेपाल सरकार के इस फैसले का वहां के स्थानीय किसानों ने स्वागत किया है. मधेस प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि और सहकारी मंत्रालय के सूचना अधिकारी अजय ग्यावली ने बताया “भारत से आने वाले फलों पर रोक लगने से स्थानीय किसानों को इस सीजन में भारतीय फलों से कॉम्पिटिशन (प्रतिस्पर्धा) नहीं करना पड़ रहा है. इससे नेपाल के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिला है, जो कि एक सकारात्मक संकेत है.

“नेपाल के मधेस प्रांत में स्थित सिराहा, सप्तरी और धनुषा जिले आम के सबसे बड़े उत्पादक हैं. लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि नेपाल में आम का सीजन केवल दो महीने (मध्य-मई से मध्य-जुलाई) ही रहता है. ऐसे में घरेलू उत्पादन पूरे देश की सालाना मांग को पूरा करने के लिए काफी नहीं है.

फ्रूट जूस इंडस्ट्री संकट में; बाजारों में भारी किल्लत का डर

नेपाल के स्थानीय व्यापारियों और फल संघों ने सरकार के इस फैसले पर चिंता जताई है. आम के आयात पर रोक लगने से नेपाल की उन घरेलू इंडस्ट्रीज पर बुरा असर पड़ेगा जो आम पर टिकी हैं, जैसे कि मैंगो फ्रूट जूस (Fruit Juice) बनाने वाली कंपनियां.

जनकपुरधाम के ‘फ्रूट एंड वेजिटेबल ट्रेडर्स एसोसिएशन’ के महासचिव भुवनेश्वर पुर्बे ने चेतावनी दी है कि भारत से आयात पूरी तरह ठप होने से घरेलू बाजार में आम की भारी किल्लत हो जाएगी. हालांकि अभी जनकपुरधाम से काठमांडू और अन्य हिस्सों में रोज 50 टन स्थानीय आम भेजा जा रहा है, पर यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है.

आम और केले के दाम पहुंचे आसमान पर

इस प्रतिबंध का सीधा असर अब नेपाल के आम उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है. मांग और सप्लाई का संतुलन बिगड़ने से फलों के दाम बेकाबू हो रहे हैं. वर्तमान में काठमांडू में आम की कीमत 100 से 150 नेपाली रुपया (NPR) प्रति किलो चल रही है.

व्यापारियों का कहना है कि अगर भारत से बैन जल्द नहीं हटा, तो ये दाम बहुत ऊपर चले जाएंगे. आम के साथ-साथ भारत से केले के आयात पर भी रोक लगी हुई है. इसके चलते जो केला पिछले साल तक 120-150 नेपाली रुपया प्रति दर्जन मिलता था, वह अब दोगुना होकर 250 से 300 नेपाली रुपया प्रति दर्जन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.

क्या है इस समस्या का असली समाधान ?

व्यापारियों ने नेपाल सरकार को सलाह दी है कि भारत से आने वाले फलों पर पूरी तरह से बैन लगाना कोई समझदारी भरा फैसला नहीं है. सरकार को चाहिए कि वह सीमावर्ती क्षेत्रों (Border Areas) में अपनी क्वारंटाइन और फूड टेस्टिंग प्रणालियों को मजबूत करे. भारत से आने वाले फलों की सीमा पर ही प्रॉपर क्वालिटी टेस्टिंग (गुणवत्ता जांच) की जाए और जो फल मानकों पर खरे उतरें, उन्हें बाजार में आने दिया जाए.

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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