6 महीने से ज्यादा पेमेंट अटका तो देना पड़ सकता है 50% पैसा! MSME बिल में नया नियम

MSME के लिए सरकार नया संशोधन बिल लाई है. अब पेमेंट में देरी कम होगी, TReDS अनिवार्य होगा और रजिस्ट्रेशन भी आसान बनेगा.

देश के करोड़ों छोटे कारोबारियों के लिए राहत भरी खबर है. केंद्र सरकार ने MSME Development (Amendment) Bill, 2026 संसद में पेश किया है. इस बिल का मकसद छोटे और मझोले कारोबार (MSME) को समय पर भुगतान दिलाना, सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान बनाना और नियमों का बोझ कम करना है. अगर यह बिल लागू होता है, तो खास तौर पर सरकारी कंपनियों के साथ काम करने वाले MSME को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है.

क्या बदलेगा सबसे पहले?

बिल के मुताबिक, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (Central PSUs) को MSME से मिलने वाले सभी इनवॉइस अब Trade Receivables Discounting System (TReDS) प्लेटफॉर्म के जरिए प्रोसेस करने होंगे. इसका मकसद है कि छोटे कारोबारियों को अपने भुगतान के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े और जरूरत पड़ने पर उन्हें जल्दी वर्किंग कैपिटल मिल सके. राज्य सरकारें भी चाहें तो अपनी सरकारी कंपनियों के लिए ऐसा ही नियम लागू कर सकती हैं.

MSME रजिस्ट्रेशन होगा आसान?

सरकार इस बिल के जरिए पूरी तरह मुफ्त राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म शुरू करने का प्रस्ताव लेकर आई है.

इससे:

  • MSME का रजिस्ट्रेशन आसान होगा.
  • सरकारी योजनाओं तक पहुंच बेहतर होगी.
  • अलग-अलग प्रक्रियाओं में समय कम लगेगा.

यानी छोटे कारोबारियों को कागजी झंझट कम झेलना पड़ेगा.

पेमेंट विवाद होने पर क्या होगा?

बिल में पेमेंट से जुड़े विवादों को जल्दी निपटाने पर भी जोर दिया गया है. इसके लिए राज्यों को अतिरिक्त MSME Facilitation Councils बनाने होंगे, ताकि भुगतान से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा हो सके. इसके अलावा, अगर किसी MSME के पक्ष में फैसला आता है और खरीदार उस फैसले को अदालत में चुनौती देता है, लेकिन मामला 6 महीने से ज्यादा समय तक लंबित रहता है, तो उसे दिए गए अवॉर्ड की कम से कम 50% रकम जारी करनी पड़ सकती है. साथ ही अदालत को यह अधिकार भी मिलेगा कि अपील के दौरान जमा राशि में से भुगतान करने का निर्देश दे सके. इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों की नकदी की दिक्कत कम करना है.

नियमों में और क्या बदलाव होंगे?

  • आपराधिक सजा में राहत: कुछ मामलों में आपराधिक जुर्माने की जगह चेतावनी और तय मौद्रिक पेनाल्टी का प्रावधान होगा.
  • अपील का अधिकार: अगर किसी कारोबारी पर पेनाल्टी लगती है, तो वह उसके खिलाफ अपील कर सकेगा.
  • MSME Facilitation Council में बदलाव: हर काउंसिल में 3 से 5 सदस्य होंगे और एक कानूनी विशेषज्ञ को शामिल करना अनिवार्य होगा.


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लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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