आधी कीमत पर मिलेगी विदेशी शराब और कारें? भारत-EU डील के वो सच जो आपको हैरान कर देंगे !

India EU Free Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई ऐतिहासिक ‘महा-डील’ से विदेशी कारें, वाइन और मशीनरी काफी सस्ती होंगी. टैरिफ में भारी कटौती से द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होगा और लाखों नए रोजगार मिलेंगे. यह समझौता चीन पर निर्भरता कम कर भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.

India EU Free Trade Deal: 18 साल की लंबी बातचीत के बाद आखिरकार भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच व्यापार को लेकर एक बड़ा समझौता हो गया है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कहा है, क्योंकि यह भारत की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है. सरल शब्दों में कहें तो, अब यूरोप से सामान मंगाना और भारत से वहां सामान भेजना बहुत आसान और सस्ता हो जाएगा.

हमारे लिए क्या सस्ता होने वाला है?

इस समझौते के बाद आपके बजट पर सीधा असर पड़ेगा. कई लग्जरी और जरूरत की चीजें सस्ती होने की उम्मीद है.

  • गाड़ियां: जो विदेशी कारें पहले बहुत महंगी होती थीं, उन पर टैक्स 110% से घटकर सिर्फ 10% रह जाएगा.
  • खान-पान: जैतून का तेल (Olive Oil), फ्रूट जूस और पैकेट बंद खाना (Processed Food) सस्ता होगा.
  • पार्टी और ड्रिंक्स: वाइन और बीयर पर लगने वाले टैक्स में भी 40% से 50% तक की कटौती की गई है.
  • दवाइयां और मशीनरी: इलाज में काम आने वाली मशीनें और विदेशी दवाएं अब कम दाम में मिल सकेंगी.

चीन और अमेरिका पर कम होगी निर्भरता

अब तक हम बहुत सी चीजों के लिए चीन या अमेरिका की तरफ देखते थे. इस डील के बाद भारत और यूरोप एक-दूसरे के इतने करीब आ जाएंगे कि हमें दूसरों पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. यह भारत को एक ‘ग्लोबल हब’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.

नौकरियों की आएगी बाढ़

जब व्यापार बढ़ता है, तो काम भी बढ़ता है. जानकारों का कहना है कि इस डील से भारत में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे. यूरोप की कंपनियां भारत में फैक्ट्रियां लगा सकती हैं, जिससे डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नौकरियां मिलेंगी और छोटे व्यापारियों (SME) के लिए यूरोप का बड़ा बाजार खुल जाएगा.

पर्यावरण के लिए मदद

यूरोप सिर्फ व्यापार ही नहीं कर रहा, बल्कि भारत को प्रदूषण कम करने और ‘ग्रीन एनर्जी’ अपनाने के लिए लगभग 4500 करोड़ रुपये (500 मिलियन यूरो) की मदद भी देगा. इससे भारत में सोलर और क्लीन एनर्जी के प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा.

कारोबारियों को क्या फायदा होगा?

यूरोप के व्यापारियों को हर साल करीब 4 अरब यूरो की बचत होगी.
केमिकल, मशीनरी और स्पेस (Space) से जुड़े सामान पर अब कोई एक्स्ट्रा ड्यूटी नहीं देनी होगी.
डिजाइन और कॉपीराइट के नियम कड़े होंगे, जिससे बिजनेस करना सुरक्षित हो जाएगा.

Also Read : मारुति और टाटा के गढ़ में सेंध लगाएगी यूरोपीय कारें ? नई ट्रेड डील से बदला भारतीय ऑटो बाजार का समीकरण

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >