LPG Price: 15 महीने से सस्ता गैस बेच रहीं कंपनियां घाटे में, सरकार देगी अरबों की मदद

LPG Price: पिछले 15 महीनों से घरेलू एलपीजी को लागत से कम कीमत पर बेच रही तेल कंपनियां भारी घाटे में हैं. सरकार इन कंपनियों को राहत देने के लिए 30,000 से 35,000 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी देने पर विचार कर रही है. निर्णय जल्द संभव है.

LPG Price: केंद्र सरकार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की लागत से कम कीमत पर बिक्री से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को 30,000 से 35,000 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दिए जाने की संभावना है.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि वित्त मंत्रालय इस समय तेल कंपनियों को हुए वास्तविक घाटे और उसकी भरपाई के लिए उपयुक्त व्यवस्था पर काम कर रहा है. हालांकि, वित्त वर्ष 2025–26 के बजट में इस घाटे की भरपाई के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है.

लेकिन सरकार अप्रैल में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर करीब 32,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व पहले ही जुटा चुकी है. इस राजस्व का उपयोग एलपीजी से हुए घाटे की भरपाई में किया जा सकता है. अधिकारी के अनुसार, “तेल विपणन कंपनियां सरकार का ही हिस्सा हैं. नुकसान की भरपाई की जाएगी. इस पर मूल्यांकन जारी है कि कुल नुकसान कितना हुआ और इसे किस तंत्र से पूरा किया जाए.”

नियंत्रित कीमतों की वजह से नुकसान

भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतें सरकार द्वारा नियंत्रित होती हैं ताकि आम जनता को अंतरराष्ट्रीय बाजार की महंगाई से राहत दी जा सके. लेकिन देश में रसोई गैस का उत्पादन स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण एलपीजी का आयात करना पड़ता है. यह आयात सऊदी अरब की कीमतों (Saudi CP) के आधार पर होता है, जो वैश्विक मानक हैं.

इसका परिणाम यह होता है कि तेल कंपनियों को लागत से कम दर पर घरेलू एलपीजी बेचनी पड़ती है, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है.

2024-25 में 40,500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

वित्त वर्ष 2024–25 के लिए अनुमान लगाया गया है कि तेल कंपनियों को एलपीजी की बिक्री से लगभग 40,500 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. इस घाटे की भरपाई के लिए सरकार अब राहत पैकेज पर गंभीरता से विचार कर रही है.

एक बार जब यह सब्सिडी जारी हो जाती है, तो तेल कंपनियों को यह स्वतंत्रता होगी कि वे इस राशि का उपयोग पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) या अन्य व्यावसायिक आवश्यकताओं में किस प्रकार करें.

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Published by: Abhishek pandey

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