महंगी LPG और सप्लाई की टेंशन के बीच नई तैयारी, सरकार से पहली LPG Efficiency Policy की मांग

LPG Efficiency Policy: रसोई गैस सिर्फ घरों की जरूरत नहीं है, बल्कि देश के लाखों होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, फूड यूनिट और छोटे कारोबारियों का काम भी इसी पर चलता है. ऐसे में जब LPG की कीमत बढ़ती है, तो इसका सीधा असर कारोबार के खर्च और आम लोगों की जेब पर भी पड़ता है.

LPG Efficiency Policy: अब बढ़ती कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता के बीच LPG के बेहतर इस्तेमाल को लेकर नई नीति बनाने की मांग उठी है.

पुणे गैस ने केंद्र सरकार से देश में पहली बार LPG Efficiency Policy Framework लागू करने की मांग की है. कंपनी ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भेजे प्रस्ताव में कहा है कि सिर्फ LPG की सप्लाई बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि जितनी गैस उपलब्ध है उसका सही और कम बर्बादी के साथ इस्तेमाल भी जरूरी है.

LPG महंगा होने से किन लोगों पर पड़ा असर?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात के कारण दुनियाभर में ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा है. इसका असर LPG की कीमतों पर भी देखने को मिला है. पुणे गैस के अनुसार, कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत करीब 3,100 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि इस साल की शुरुआत में यह लगभग 1,884 रुपये थी. इस बढ़ी कीमत का असर खासतौर पर उन जगहों पर पड़ा है जहां LPG का इस्तेमाल ज्यादा होता है:

  • होटल और रेस्टोरेंट
  • अस्पताल
  • फूड प्रोसेसिंग यूनिट
  • लॉन्ड्री बिजनेस
  • MSME और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां

हालांकि, सरकार की कोशिशों से देश में LPG सप्लाई काफी हद तक जारी रही है. लेकिन कंपनी का कहना है कि अब गैस की खपत को ज्यादा बेहतर तरीके से मैनेज करने की जरूरत है.

सरकार से क्या चाहती है पुणे गैस?

पुणे गैस ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भेजे प्रस्ताव में LPG Efficiency Policy बनाने की मांग की है. कंपनी ने इसके तहत कई सुझाव दिए हैं:

  • इंडस्ट्री और कमर्शियल सेक्टर में LPG की बर्बादी कम करने के लिए कदम उठाए जाएं.
  • जहां इस्तेमाल के हिसाब से सही हो, वहां 47.5 किलोग्राम LOT सिलेंडर को बढ़ावा दिया जाए.
  • LPG के सही इस्तेमाल को लेकर देशभर में जागरूकता अभियान चलाए जाएं.
  • सरकार, तेल कंपनियों (OMCs) और इंडस्ट्री के बीच मिलकर काम करने की व्यवस्था बनाई जाए.
  • ज्यादा सुरक्षित और बेहतर LPG सिस्टम अपनाने के लिए नीतिगत प्रोत्साहन दिया जाए.

कंपनी का कहना है कि बड़े सिलेंडर के इस्तेमाल से बार-बार सिलेंडर बदलने की जरूरत कम हो सकती है. इससे गैस की बर्बादी, सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां और गलत इस्तेमाल की संभावना भी घट सकती है.

LPG बचाने से कैसे मजबूत होगी ऊर्जा सुरक्षा?

पुणे गैस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CEO जेसल संपत ने कहा कि भारत अब तक LPG को लेकर मुख्य रूप से इस बात पर ध्यान देता रहा है कि कितनी गैस खरीदी गई और कितनी सप्लाई हुई. उनका कहना है कि अब यह भी देखना जरूरी है कि उपलब्ध LPG का इस्तेमाल कितनी कुशलता से हो रहा है. अगर हर किलो LPG का सही इस्तेमाल होगा तो:

  • कारोबारियों का खर्च कम होगा.
  • देश की LPG मांग पर दबाव घटेगा.
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी.

उन्होंने LPG Efficiency को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की अपील की है, ताकि LPG पर निर्भर उद्योगों को भी राहत मिल सके.

LPGenius सिस्टम से क्या फायदा मिलेगा?

पुणे गैस ने अपने प्रस्ताव में LPGenius नाम के LPG मैनेजमेंट सिस्टम की जानकारी भी दी है. कंपनी के मुताबिक, यह सिस्टम कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर्स को LPG की खपत बेहतर तरीके से मैनेज करने, सुरक्षा बढ़ाने और खर्च कम करने में मदद करता है.

कंपनी ने मंत्रालय और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के साथ मिलकर काम करने की पेशकश की है. इसके तहत वह अपने फील्ड डेटा, अनुभव और केस स्टडी साझा करेगी, ताकि भारत में LPG के इस्तेमाल को ज्यादा सुरक्षित, किफायती और प्रभावी बनाया जा सके.

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Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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