IPO Listing Rules 2026: भारत सरकार ने शेयर बाजार में लिस्टिंग (Listing) के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है. Securities Contracts (Regulation) Amendment Rules, 2026 के तहत अब बड़ी कंपनियों को IPO लाते समय जनता (Public) को कम शेयर देने की छूट दी गई है. वित्त मंत्रालय के इस फैसले से अब देश की दिग्गज कंपनियों के लिए शेयर बाजार में कदम रखना और भी आसान हो जाएगा.
किसे मिलेगा इस नए नियम का फायदा?
यह बदलाव उन कंपनियों के लिए है जिनकी वैल्यू बहुत ज्यादा है. नियम के अनुसार, 1,600 करोड़ रुपये तक की कंपनियों को पहले की तरह ही कम से कम 25% शेयर पब्लिक को देने होंगे. लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का साइज बढ़ेगा, यह प्रतिशत कम होता जाएगा. उदाहरण के लिए, 50,000 करोड़ से बड़े साइज वाली कंपनियों को शुरुआत में केवल 8% शेयर ही पब्लिक को ऑफर करने होंगे. वहीं, 5 लाख करोड़ से बड़ी मेगा कंपनियों को सिर्फ 1% शेयर के साथ लिस्ट होने की अनुमति मिल गई है.
क्या पब्लिक की हिस्सेदारी कभी बढ़ेगी?
हां, सरकार ने छूट के साथ एक समय सीमा भी तय की है. जिन कंपनियों ने शुरुआत में कम शेयर दिए हैं, उन्हें धीरे-धीरे अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाकर 25% तक ले जानी होगी.
- 50,000 करोड़ तक की कंपनियां: इन्हें 3 साल के अंदर 25% का कोटा पूरा करना होगा.
- बहुत बड़ी कंपनियां: इन्हें 15% शेयरहोल्डिंग के लिए 5 साल और पूरी 25% हिस्सेदारी के लिए 10 साल तक का समय दिया गया है.
SVR शेयर्स के लिए क्या है नया आदेश?
अक्सर बड़ी कंपनियों के प्रमोटर्स के पास Superior Voting Rights (SVR) वाले शेयर होते हैं (यानी एक शेयर पर ज्यादा वोटिंग पावर). नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी कंपनी के पास ऐसे शेयर्स हैं, तो उन्हें IPO के समय साधारण शेयरों के साथ ही स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट करना अनिवार्य होगा.
पुरानी कंपनियों पर क्या होगा असर?
राहत की बात यह है कि यह नियम सिर्फ नई कंपनियों के लिए नहीं है. जो कंपनियां पहले से लिस्टेड हैं, वे भी इस नई समय-सीमा (Timelines) का लाभ उठा सकेंगी. हालांकि, अगर किसी कंपनी ने पुराने नियमों का उल्लंघन किया है, तो स्टॉक एक्सचेंज उन पर जुर्माना लगा सकते हैं.
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