Indian Stock Market 22 January 2026: भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार की सुबह की शुरुआत जबरदस्त रही है. बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार बढ़त देखने को मिली है. इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह फैसला रहा है, जिसमें उन्होंने यूरोपियन देशों पर लगाए जाने वाले टैरिफ के खतरे को टाल दिया है. ट्रंप ने ग्रीनलैंड मुद्दे पर एक फ्रेमवर्क समझौते का हवाला देते हुए तनाव कम करने के संकेत दिया हैं. इस वैश्विक राहत के साथ-साथ भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील की खबरों ने घरेलू निवेशकों का उत्साह दोगुना कर दिया है.
सेंसेक्स और निफ्टी की ओपनिंग कैसी रही?
आज के कारोबार की शुरुआत में निफ्टी 50 इंडेक्स 25,344.15 के स्तर पर खुला, जिसमें 186.65 अंकों यानी 0.74% की बढ़त दर्ज की गई है. वहीं, बीएसई सेंसेक्स ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 82,459.66 पर ओपनिंग दी है, जो पिछले दिन से 550.03 अंक या 0.67% ऊपर था. मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के अनुसार, ग्लोबल मार्केट से मिले पॉजिटिव संकेतों के अलावा डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पीएम मोदी की तारीफ और जल्द ही एक बड़ी ट्रेड डील होने की चर्चा ने कैटेलिस्ट का काम किया है. यही वजह है कि विदेशी निवेशकों (FPI) की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार आज जोश में दिख रहा हैं.
किन सेक्टर्स में दिखा सबसे ज्यादा एक्शन?
बाजार की यह तेजी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी भारी लिवाली देखी गई है. निफ्टी मिडकैप 100 में 1.2% से ज्यादा की उछाल आई है, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स भी 0.83% की मजबूती के साथ कारोबार कर रहा था. सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो सेक्टर 1.29% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा है. इसके अलावा आईटी, मेटल, फार्मा और सरकारी बैंकों (PSU Banks) के शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर खरीदारी की है. लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स आज हरे निशान के साथ खुले हैं, जो बाजार में चौतरफा मजबूती का संकेत है.
निवेशकों के लिए क्या है बड़ी चुनौती?
बाजार में तेजी के बीच कुछ चुनौतियां भी बरकरार हैं. एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के मुताबिक, डॉलर की मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली मार्केट के लिए एक बड़ा दबाव है. गुरुवार के आंकड़ों को देखें तो FII ने 1,680.25 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 4,181.74 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभाले रखा है. इसके अलावा, रुपया गिरकर 91.69-91.72 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे इंपोर्टेड महंगाई का खतरा बढ़ गया है. फिलहाल, भारतीय बाजार एशियाई बाजारों की तरह ट्रंप के यू-टर्न और ग्लोबल राहत का जश्न मना रहे हैं.
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