कोरोना का असर : रेलवे ने बढ़ायी प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत, 250 स्टेशनों पर अब देने होंगे 50 रुपये

कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रसार को कम करने के लिए मंगलवार को पश्चिम क्षेत्र के मुंबई समेत छह डिवीजनों के करीब 250 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत को 10 रुपये की जगह 50 रुपये कर दिया गया है.

मुंबई : कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रसार की रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से तो सख्त एहतियाती कदम उठाये ही जा रहे हैं, लेकिन रेलवे ने रेलवे स्टेशनों पर भीड़भाड़ कम करने के लिए गजब का तरीका अख्तियार किया है. मंगलवार को पश्चिम क्षेत्र के मुंबई समेत छह डिवीजनों के करीब 250 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत को 10 रुपये की जगह 50 रुपये कर दिया गया है. यह बढ़ोतरी मंगलवार से ही लागू होगी.

भारतीय रेलवे के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि पश्चिम क्षेत्र के छह डिवीजनों के 250 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत को बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि जिन छह डिवीजनों के स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट के दामों में इजाफा किया गया है, उनमें मुंबई, वडोदरा, अहमदाबाद, रतलाम, राजकोट और भावनगर डिवीजन के स्टेशन शामिल हैं.

प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत में इजाफे को लेकर रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर रेलवे स्टेशनों पर लोगों की भीड़ को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है, ताकि लोग-बाग अधिक कीमत होने की वजह से बड़ी संख्या में प्लेटफॉर्म पर एकत्र न हो सकें.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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